लखीमपुर खीरी। कड़ी धूप और भीषण गर्मी ने तराई को झुलसा कर रख दिया है। हवाएं जैसे ठहर गई हैं। इस गर्मी से न तो लोगों को घर में चैन मिल रहा है न दफ्तरों में। कड़ी धूप से नदी, ताल, तालाबों का पानी सूख चुका है। भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे गिर गया है। इससे कई ब्लाकों में बोरिंग फेल हो गई हैं। खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है तो गन्ने की फसल भी सूख रही है। जिले में सूखे की स्थिति पैदा होती जा रही है।
मंगलवार को अधिकतम तापमान 46.5 और न्यूनतम तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। सुबह से ही सूरज तपने लगा। दोपहर होते-होते जैसे आसमान से आग बरसने लगी। 11 बजते-बजते सड़कें गर्म तवे सी तपने लगीं। इससे सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो गया। दिन में हवाएं बंद रहने से सूरज की तपिश कुछ ज्यादा ही महसूस हुई। कड़ी धूप और गर्मी के कारण दिन में 11 बजे से शाम पांच बजे तक बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
लघु सिंचाई विभाग के अभियंताओं का कहना है कि जिले के बेहजम, मितौली, पसगवां, मोहम्मदी और बांकेगंज ब्लाकों में भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे गिर गया है। जिले में सामान्य रूप से जलस्तर छह मीटर तक नीचे होना चाहिए। इस समय भूगर्भ जलस्तर 10 मीटर नीचे तक चला गया है। यह ब्लाक डार्क घोषित होने के कगार पर हैं। इन ब्लाकों में निजी बोरिंग फेल हो गई हैं। इनसे पानी नहीं आ रहा है। इसके चलते खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। खेतों में खड़ी गन्ने की फसलें सूख रही हैं।
भीषण गर्मी से बिलबिलाए बच्चों ने अंगनी लोटना शुरू कर दिया है। बच्चे काले मेघा पानी दे, काले मेघा पानी दे की गुहार लगाते हुए लोगोें के आंगन में पानी डालकर लोट लगा रहे हैं। लोग मानसून की आस में आसमान ताक रहे हैं। बादलों के दर्शन न होने से लोग मायूस हैं। बुजुर्गों का कहना है कि इतनी ज्यादा गर्मी का सामना उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं किया।