अंग्रेजी शराब की बिक्री में नहीं हो रही अपेक्षित वृद्धि
लखीमपुर खीरी। जिले में कच्ची शराब का कारोबार अर्से से चल रहा है। बताया जाता है कि 217 गांवों में यह धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। चुनावी मौसम में यह और तेजी पकड़ चुका है। नतीजा यह है कि अंग्रेजी शराब की बिक्री गति नहीं पकड़ पा रही है। इसमें दो से तीन फीसदी की मामूली वृद्धि बताई जा रही है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि मतदान का समय नजदीक आने पर बिक्री जोर पकड़ेगी।
आबकारी अधिकारियों की मानें तो इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे अधिकतर गांवों में कच्ची शराब बनाने का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। खेतों और जंगलों में दर्जनों भट्ठियां सुलग रही हैं। प्रतिदिन औसतन तीन से चार हजार लीटर कच्ची शराब बनाई जा रही है। इसी तरह जिले के गांजरी इलाके धौरहरा, निघासन, सिंगाही आदि क्षेत्रों के साथ-साथ गोला, मोहम्मदी और पसगवां क्षेत्र के गांव भी कच्ची शराब के लिए बदनाम हैं। सूत्र बताते हैं कि जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का शोरगुल बढ़ेगा, कच्ची शराब का धंधा तेजी से बढ़ेगा।
अंग्रेजी शराब की बिक्री पर आयोग की नजर
शराब की बिक्री को लेकर चुनाव आयोग भी सख्त हो गया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि दुकानों पर रोज की अपेक्षा अगर अंग्रेजी शराब की बिक्री में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी पाई जाती है तो यह माना जाना चाहिए कि चुनाव में शराब की खपत की जा रही है। ऐसा होने पर अधिकारी संबंधित दुकान के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। इसे लेकर आबकारी विभाग ने दुकानों की निगेहबानी बढ़ा दी है।
इनसेट-
प्रतिदिन 20 जगह पर हो रही छापामारी
आबकारी विभाग व पुलिस की संयुक्त टीमें गांवों में बनने वाली कच्ची शराब पर शिकंजा कसने के लिए हर दिन 20 जगह छापामारी कर रही हैं। हर दिन औसतन 100 लीटर तक कच्ची शराब पकड़ी भी जा रही है। बावजूद इसके यह धंधा थम नहीं रहा है।
वर्जन-
कच्ची शराब पर शिकंजा कसने के लिए टीमें गांवों में छापामारी कर रही हैं। पुलिस का भी भरा सहयोग मिल रहा है। जिन गांवों को चिह्नित किया गया है, वहां विशेष नजर रखी जा रही है।
- एसएन दुबे, जिला आबकारी अधिकारी।