धौरहरा से टिकट काटकर दाउद को दे देने से थे खफा
लखीमपुर खीरी। जिले के पुराने बसपाइयों में गिने जाने वाले और पसगवां की पूर्व ब्लाक प्रमुख रेखा वर्मा के पति अरुण वर्मा ने बहुजन समाज पार्टी से किनारा कर लिया है। उनके बसपा छोड़ने से पार्टी को करारा झटका लगा है।
बहुजन समाज पार्टी के नेता अरुण वर्मा की गिनती जिले के प्रमुख बसपाइयों में की जाती है। वर्ष 2002 में बसपा ने उन्हें हैदराबाद विधान सभा से अपने टिकट पर मैदान में उतारा था तब वह दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा अपने दम खम से वह पत्नी रेखा वर्मा को पूर्व में दो बार पसगवां का ब्लाक प्रमुख और छोटे भाई अनूप वर्मा को पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा चुके हैं।
वर्ष 2012 में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव के बाद से ही बसपा लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई थी। इसी कड़ी में करीब साल भर पहले बसपा ने जिले की दोनों संसदीय सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए थे। इसमे धौरहरा लोकसभा सीट से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के मुकाबले बसपा ने अरुण कुमार वर्मा को तथा खीरी संसदीय सीट से सांसद एवं वरिष्ठ कांग्रेसी ज़फर अली नकवी के मुकाबले पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान को प्रत्याशी घोषित किया था। बसपा के इन दोनों ही नेताओं ने धौरहरा लोक सभा सीट से अपने चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी थी। होर्डिंग से लेकर वाल पेंटिंग के साथ-साथ दोनों नेताओं ने ताबड़तोड़ कई सभाएं कर माहौल अपने पक्ष में करने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी थी। करीब छह माह पहले बसपा ने अपने दोनों घोषित प्रत्याशियों का टिकट काटकर खीरी से कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हुए पूर्व विधायक अरविंद गिरि को तथा धौरहरा से पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक दाउद अहमद को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया।
सूत्र बताते हैं कि इसके बाद से ही बसपा नेता अरुण कुमार वर्मा का पार्टी से मन खिन्न हो गया था। अंतत: उन्होंने गुरुवार को बसपा से अपना नाता तोड़ लिया। उन्होंने स्वयं अमर उजाला कार्यालय पहुंचकर पार्टी छोड़ने की इत्तला दी। बसपा जिलाध्यक्ष प्रदीप गौतम को भी उन्होंने अपना इस्तीफा भेज दिया है। पार्टी छोड़ने के बारे में श्री वर्मा ने सिर्फ इतना कहा है कि वह स्वयं अपने को बसपा में बने रहने के लिए असमर्थ पाने के कारण ऐसा कर रहे हैं।
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भाजपा में जाएंगे अरुण!
लखीमपुर खीरी। बसपा से त्यागपत्र देने वाले अरुण कुमार वर्मा के भाजपा में जाने की चर्चा है। सूत्र बताते हैं कि धौरहरा से टिकट कटने के साथ ही अरुण ने किसी और पार्टी में जगह तलाशनी शुरू कर दी थी। सूत्र बताते हैं कि इस बीच जिले के एक भाजपा नेता ने उनकी मुलाकात पीलीभीत के सांसद एवं भाजपा महासचिव वरुण गांधी से कराई। इसके बाद अरुण कुछ अन्य भाजपा नेताओं से भी मिले। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं से मिली हरी झंडी के बाद अरुण ने बसपा को बॉय-बॉय की है। स्वयं अरुण ने दबी जुबान से इसकी पुष्टि की।