आज पूरे प्रदेश में एक साथ होगी गणना
लखीमपुर खीरी। प्रकृति के सफाई कर्मी कहे जाने वाले गिद्धों को बचाने की मुहिम रंग ला रही है। जिले के कई हिस्सों में इनकी मौजूदगी से पर्यावरण प्रेमी उत्साहित हैं। गिद्धों के लिए काल साबित हो रही डाइक्लोफेनिक नामक दवा के प्रयोग के चलते हाल के वर्षों में इनकी संख्या में निराशाजनक गिरावट आई थी। इनकी घटती आबादी के मद्देनजर गिद्धों को बचाने का जो अभियान शुरू हुआ था, अब उसके सार्थक परिणाम आने शुरू हो गए है।
वर्ष 2011 में पूरे प्रदेश में एक साथ हुई गिद्धों की गणना में जिला खीरी में करीब तीन सौ गिद्ध मिले थे। जिले के उत्तर खीरी वन प्रभाग के ढखेरवा, मझगईं, संपूर्णानगर पलिया, घनारा घाट, कबीरगंज, धौरहरा तथा दक्षिण खीरी वन प्रभाग के शारदानगर, भीरा मैलानी और गोला मोहम्मदी क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से बड़ी संख्या में गिद्ध दिखाई पड़ रहे हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है तराई में गिद्धों की आबादी में बढ़ोतरी हो रही है।
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तराई में मिलते हैं चार प्रजातियों के गिद्ध
यूं तो गिद्धों की करीब एक दर्जन प्रजातियां होती हैं लेकिन तराई क्षेत्र में प्रमुख रूप से गिद्धों की चार प्रजातियां पाई जाती हैं। यह हैं इजिप्शन वल्चर, लांग विल्ड वल्चर, रेड हूडेड वल्चर और व्हाइट रंप्ड वल्चर। गिद्ध मांसाहारी विशाल पक्षी है यह मरे हुए जानवरों का मांस खाकर अपना गुजारा करता है। इस तरह यह पर्यावरण को शुद्ध रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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प्राकृतिक आवास कम होने से घटी गिद्धों की संख्या
गिद्ध ऊंचे पेड़ों जैसे बरगद, सेमल, जामुन, गूलर और गुटैल आदि के पेड़ों पर अपने घोंसले बनाते हैं। इन घने और ऊंचे पेड़ों की संख्या में लगातार कमी होने से गिद्धों के लिए प्राकृतिक आवास का संकट पैदा हुआ। इससे इनकी संख्या में लगातार कमी आती चली गई।
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डाइक्लोफेनिक बनी गिद्धों का काल
वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह बताते हैं कि पशुओं को दर्द निवारक के रूप में दी जाने वाली दवा का इस्तेमाल करने वाले जानवरों के मरने पर जब गिद्ध उनका मांस खाते हैं तो दवा के प्रभाव से गिद्धों की किडनी फेल हो जाती है और उनकी मौत हो जाती है। हालांकि अब सरकार ने इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया है। वह तराई नेचर कंजरवेशन सोसायटी के माध्यम से तराई को डाइक्लोफेनिक जोन बनाने का अभियान चला रहे हैं।
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गिद्धों को बचाने के हो रहे यह प्रयास
गिद्धों को बचाने के लिए वन विभाग के अलावा रॉयल सोसायटी फार प्रोटक्शन आफ वर्ल्ड और तराई नेचर कंजरवेशन सोसायटी गिद्धों को बचाने की मुहिम चला रही है। सरकार ने पिंजौर, बंगाल, असोम समेत चार जगहों पर वल्चर ब्रीडिंग सेंटर खोले हैं। इन जगहों पर गिद्धों का प्रजनन कराकर पूरे देश में छोड़ा जा रहा है।
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पूरे प्रदेश में आज होगी एकसाथ गणना
डीएफओ नीरज कुमार ने बताया कि 25 अप्रैल को वन विभाग पूरे प्रदेश में एक साथ गिद्धों की गणना करा रहा है। यह गणना प्रदेश के सभी वन प्रभागों में एक साथ होगी। इसके लिए गिद्धों के पाए जाने वाले स्थानों को चिह्नित करने का काम पूरा कर लिया गया है।