लखीमपुर खीरी। पूर्वदशम कक्षाओं के बच्चों को छात्रवृत्ति देने की कवायद चल रही है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों पर संकट गहरा गया है। डीएम के निर्देश पर कराए गए सत्यापन में स्कूलों द्वारा भेजे गए आवेदन पत्रों के सापेक्ष उपस्थिति में भारी कमी पाई गई है। इससे प्राइवेट स्कूलों द्वारा जमा किए आवेदन पत्र संदेह के दायरे में आ गए हैं। वहीं स्कूल के पात्र बच्चों को भी इस गफलत में छात्रवृत्ति पाने के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
वित्तीय वर्ष 2012-13 में छात्रवृत्ति वितरण की शुरुआत देर से हो सकी है। अभी कुछ दिन पूर्व ही शासकीय विद्यालयों के बच्चों को वितरित करने के लिए पहले राउंड में छात्रवृत्ति भेजी गई है। जबकि प्राइवेट स्कूलों (सहायता/मान्यता प्राप्त) में छात्रवृत्ति वितरण के लिए धनराशि ग्राम निधि या बच्चों के खातों में नहीं भेजी गई है। कारणों के बारे अफसर बताते हैं कि डीएम के निर्देश पर इन स्कूलों द्वारा जमा किए गए आवेदन पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के लिए एसडीएम के निर्देशन में राजस्व विभाग कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सत्यापन के दौरान अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में छात्र संख्या काफी कम पाई गई है, जिससे कई पेंच भी बन गए हैं। कुछ ब्लाकों से आई जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
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आवेदन पत्रों की सापेक्ष छात्रों की उपस्थिति कम
पलिया ब्लाक से आई सत्यापन रिपोर्ट के मुताबिक आचार्य शिक्षा संस्थान देवीपुर के 188 बच्चों की सूची छात्रवृत्ति के लिए बीएसए कार्यालय से स्वीकृत होकर संबंधित विभागों में जमा की गई थी। राजस्व निरीक्षक द्वारा तीन नवंबर को स्कूल में बच्चों की उपस्थिति का सत्यापन किया गया, तो 130 बच्चे ही उपस्थित मिले हैं। केन ग्रोवर विद्यालय मझगई ने 274 बच्चों के आवेदन पत्रों की सूची जमा की थी, लेकिन मौके पर हुए सत्यापन में 155 बच्चे ही उपस्थित मिले हैं। इसी तरह गौतम बुद्घ पब्लिक स्कूल में 219 के स्थान पर 126 और मदर टेरेसा स्कूल पलिया में 197 के सापेक्ष 92 बच्चों की उपस्थिति पाई गई है।
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अभी कुछ ब्लाकों की रिपोर्ट मिली है, लेकिन अन्य ब्लाकों से सत्यापन रिपोर्ट आनी हैं। सत्यापन रिपोर्ट में छात्रसंख्या कम पाई गई है, जिससे स्कूलों से वेरीफिकेशन कराया जाएगा। इसके पश्चात ही डीएम के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-विकास शर्मा, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी