लखीमपुर खीरी। खरीफ सीजन में किसानों को 90 फीसदी छूट पर दी जाने वाली जिंक सल्फेट पर शासन की नीति ने ग्रहण लगा दिया है। जिंक के वितरण का जिम्मा कृषि विभाग से हटाकर यूपी स्टेट एग्रो को सौंपा गया है, जिसके जिले भर में केवल तीन ही विक्रय केंद्र हैं। इसमें स्टाफ का जबरदस्त टोटा दुरूह स्थिति उत्पन्न कर रहा है। ऐसे में 15 ब्लाकों के लघु एवं सीमांत किसानों को अनुदान का लाभ मिलना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
बता दें कि सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों के लिए खरीफ सीजन में 90 फीसदी अनुदान पर जिंक सल्फेट वितरण की व्यवस्था की है। योजना की शुरुआत में कृषि विभाग द्वारा ब्लाक स्तरीय राजकीय कृषि बीज भंडार केंद्रों के माध्यम से वितरण कराया गया था। ब्लाक स्तर पर जिंक का वितरण होने से आसपास के गांवों में रहने वाले किसानों को भी आसानी रहती थी। खरीफ सीजन 2011 से शासन ने वितरण की व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। अब जिंक के वितरण का जिम्मा यूपी स्टेट एग्रो को दिया जा चुका है, जिसके तीन विक्रय केंद्र लखीमपुर, गोला व भीरा में हैं। इन केंद्रों का हालत भी बहुत पतली है, क्योंकि भीरा में किसी कर्मचारी की तैनाती न होने से केंद्र अर्से से बंद पड़ा है। वहीं लखीमपुर में एकमात्र जिला प्रबंधक रामनरेश की ही तैनाती है। जबकि गोला में एकमात्र केंद्र प्रभारी है। इसके अलावा स्टाफ के नाम पर चपरासी भी नहीं है। ऐसे में एग्रो द्वारा किसानों को जिंक सल्फेट का वितरण कर पाना टेढ़ी खीर से कम नहीं है।
बाक्स
ऐसे तो तमाम किसान रह जाएंगे वंचित
यूपी स्टेट एग्रो के जिला प्रबंधक रामनरेश ने बताया कि स्टाफ की कमी प्रमुख समस्या बनी हुई है, जिसके चलते जिंक का आवंटन मिलने पर लखीमपुर व गोला स्थित केंद्रों से वितरण कराया जाएगा। किसानों को यहां आकर जिंक सल्फेट लेनी पड़ेगी। पिछले वर्ष 52.40 एमटी जिंक सल्फेेट का वितरण किया गया था।
बाक्स
अनुदान से ज्यादा लग जाएगा किराया
लघु एवं सीमांत किसानों के साथ इसे मजाक ही कहा जाएगा। कि एक तरफ अनुदान है, तो दूसरी तरफ किराया समेत कई खर्चे, जिससे जिंक महंगी पड़ने वाली है। मसलन ईसानगर, धौरहरा, रमियाबेहड़ आदि क्षेत्र के किसान को लखीमपुर से जिंक मिलेगी। तो पलिया, पसगवां आदि क्षेत्र के किसानों को गोला तक दौड़ लगानी पड़ेगी। किसान बही के मुताबिक जिंक देने की व्यवस्था है, जिसमें छोटे किसानों को पांच से 10 किग्रा तक ही जिंक 90 फीसदी अनुदान पर मिल सकती है। ऐसे में किसानों के सामने अनुदान से ज्यादा किराए खर्च का संकट है।
बाक्स
शासन स्तर से हुआ फैसला
जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह ने बताया कि जिंक सल्फेट के वितरण की व्यवस्था शासन स्तर से हुई है। एग्रो के पास संसाधन कम होने और केंद्रों की संख्या कम होने से किसानों को दिक्कतें जरूर होंगी। फिर भी किसानों को अधिक से अधिक सहूलियत देने के प्रयास किए जाएंगे।