अंजुमन करे तो क्या, आमदनी अठन्नी तो कैसे खर्च करे रुपैया
लखीमपुर खीरी। पिछले एक दशक में महंगाई भले ही चार गुना बढ़ गई हो, लेकिन वक्फ बोर्ड द्वारा 100 विधवाओं को दी जाने वाली पेंशन की रकम अभी भी मात्र 100 रुपये प्रति माह ही है। यही नहीं मस्जिद में पांच वक्त की नमाज पढ़ाने वाले पेश इमामों को भी 2100 रुपये से चार हजार रुपये तक में गुजर करना पड़ रहा है। वक्फ बोर्ड दोनों में ही दरियादिली दिखाना चाहता है, इसके अलावा वह दीनी तालीम को और ‘रोशनी’ देना भी चाहता है, लेकिन अठन्नी आमदनी से रुपया खर्च करे तो कैसे।
यहां आय के लिए वक्फ की जो संपत्तियां गिनी जाती हैं उसमें मुस्लिम मुसाफिर खाना, बगदादी दवा खाना, बैंक तथा कुछ स्थानों पर किरायेदारी की दुकानों के अलावा शहर के कब्रिस्तान मुख्य हैं। इसके अलावा अतिया (दान) से भी कुछ धन वक्फ बोर्ड को मिल जाता है। इस तरह वक्फ संपत्तियों आदि की नौ मदें आय के श्रोत हैं, लेकिन खर्चे के मद वाली संख्या करीब 18 है। इसमे मुसारिफ खाने के स्टाफ का वेतन, शहर की जामा मस्जिद, कचहरी मस्जिद, पुलिस लाइन मस्जिद तथा ईदगाह के पेश इमामों को दिया जाने वाले वेतन, वेतन अंजुमन स्टाफ, के साथ जिन कब्रिस्तानों से आय प्राप्त होती है उसकी देखरेख के लिए रखे स्टाफ, उसकी चहारदीवारी आदि का खर्च भी वक्फ को इसी आमदनी में से करना होता है। लावारिस लाशों के दफनाने की जिम्मेदारी भी वक्फ इसी आमदनी से निकालता है। गनीमत यहीं तक रहती तो चल जाती। खास बात यह है कि वक्फ संपत्तियों से जो आय प्राप्त होती है उसकी 7 फीसदी रकम वक्फ बोर्ड को बतौर मुताल्बा देनी पड़ जाती है। यह रकम भी हर साल करीब 50 हजार से अधिक बैठती है। इसके अलावा नगर पालिका को टैक्स के रूप में भी करीब 40 हजार रुपये का भुगतान वक्फ बोर्ड करता है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से करीब 11 लाख रुपये की आय अंजुमन इस्लामिया को हुई, जबकि खर्च करीब 10 लाख रुपये हुआ। यह बचत तब हुई जब विधवा पेंशन प्रति विधवा 100 रुपये तथा पेश इमामों का वेतन चार हजार से अधिक नहीं है। वक्फ बोर्ड 100 महिलाओं को दी जाने वाली पेंशन की रकम 100 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये तथा पेश इमामों को वेतन 6000-8000 रुपये करना चाहता है, लेकिन आमदनी को देखते हुए यह संभव नहीं हो पा रहा है।
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वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कई जगह अवैध कब्जा है। उसे हटाने तथा दुकानों की किरायेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव भी अंजुमान इस्लामिया द्वारा प्रशासन व वक्फ बोर्ड को भेजा जा चुका है। इसके अलावा वक्फ संपत्ति धार्मिक संपत्ति है इस लिए नगर पालिका टैक्स भी कम कराने के लिए प्रशासन से कहा गया। पर यह नहीं हुआ। अंजुमन दीनी तालीम के लिए और मदरसे खोलना चाहता है तथा कब्रिस्तान की चहारदीवारी आदि भी खिंचवाना चाहता है, लेकिन धन के टोटे के कारण यह कुछ भी संभव नहीं हो पा रहा है।
रिज़वान रशीद, सचिव अंजुमन इस्लामिया (वक्फ)
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किरायेदारी बढ़ाने के लिए अंजुमन अगर अपना प्रस्ताव देता है तो दुकानदारों से वार्ता करा इसे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा अवैध कब्जेदारों से वक्फ संपत्ति को मुक्त कराने के लिए भी प्रशासन हर संभव प्रयास करेगा। कब्रिस्तानों की चहारदीवारी खिंचवाने के लिए रिपोर्ट मंगाई गई है। रिपोर्ट आने पर प्रशासन चहारदीवारी खिंचवा देगा।
अभिषेक प्रकाश, जिलाधिकारी/वक्फ सर्वे कमिश्नर