लखीमपुर खीरी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाभार्थी किसानों की ई-केवाईसी और भूमि का ब्योरा अपलोड करने की प्रक्रिया अब भी जारी है। करीब 1.31 लाख किसानों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है। इनमें से 94 हजार किसान ऐसे हैं, जिनकी भूमि का ब्योरा अपलोड नहीं हुआ है। इससे इन लाभार्थियों की किस्त रोक दी गई है।
अब तक जांच में अपात्र पाए गए 3652 किसानों से किसान सम्मान निधि की वसूली की जानी बाकी है। जबकि 791 अपात्र किसानों से 15.82 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। जिले में कुल 6.45 लाख किसानों के सापेक्ष अब तक पांच लाख 13 हजार 437 किसानों ने ई-केवाईसी कराई है, जबकि एक लाख 31 हजार 563 किसानों की ई-केवाईसी बाकी है। इसमें 94 हजार किसानों के भूलेख अपडेट नहीं हो पाए हैं। इससे इनकी किस्त रोकी जा चुकी है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि लाभार्थी किसानों की भूमि का सत्यापन करने की जिम्मेदारी तहसीलों के लेखपालों की है, लेकिन लेखपाल इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। इस कारण हजारों किसानों का डेटा सत्यापन के अभाव में शासन के पास फॉरवार्ड नहीं हो पा रहा है। अब तक किसान सम्मान निधि की 14 किस्तें किसानों को दी जा चुकी हैं। जिससे अब तक जनपद के चार लाख 80 हजार 343 किसानों को लाभ मिल सका है।
... तो इसलिए नहीं हो पा रही ई-केवाईसी
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, आधार कार्ड और भूलेख के नामों में अंतर या बैंक खाताें के नाम और आधार कार्ड के नाम-पते में अंतर होने के कारण बहुत से किसानों की केवाईसी नहीं हो पा रही है। अशिक्षित होने के कारण भी बहुत से किसान अपनी केवाईसी नहीं करा पा रहे हैं। केवाईसी न होने के कारण बहुत से किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
सरकारी कर्मचारी भी ले चुके सम्मान निधि
हजारों अपात्र किसान सम्मान निधि योजना में सेंध लगा चुके हैं। उप कृषि निदेशक के मुताबिक 3652 अपात्र किसानों को नोटिस जारी किया जा चुका है। इस योजना के शुरुआत में तमाम अपात्रों ने भी आवेदन कर दिए थे। इनकम टैक्स देने वाले अपात्र किसानों के अलावा सरकारी कर्मचारी भी चोरी-छिपे लाभ ले चुके हैं। ऐसे कर्मचारियों को चिह्नित कर लिया गया है। सैकड़ों की संख्या में सरकारी कर्मचारियों से किस्त की वसूली की जाएगी।
कुल पंजीकृत 6.45 लाख किसानों के सापेक्ष अब तक 5,13,437 किसानों की ई-केवाईसी कराई जा चुकी है। शेष बचे 1.31 लाख किसानों में से करीब 40 किसान जीवित नहीं हैं। 94 हजार किसानों का भूलेख अपडेट नहीं हो पाया है, जिससे इनकी किस्त शासन से रोक दी गई है। ई-केवाईसी के साथ ही सभी किसानों का भूलेख अपडेट कराया जाना जरूरी है।
- अरविंद मोहन मिश्रा, उप कृषि निदेशक