दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की वनभूमि पर अवैध कब्जा कर उगाए गए गन्ने से दुधवा के हाथियों की दावत होगी। वन विभाग इस गन्ने को वन उपज मान रहा है। इस वन उपज का इस्तेमाल वन्यजीवों के चारे के रूप में किया जाएगा। इसके बाद अवैध कब्जेदार वन भूमि पर उगाए गए गन्ने को न तो चीनी मिलों को और न ही क्रेशर और कोल्हुओं को बेच पाएंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि बफर जोन की करीब ढाई से तीन हजार हेक्टेयर भूमि पर जंगल के आसपास रहने वाले भू-माफिया ने कब्जा कर रखा है। इस भूमि पर कब्जेदार मुख्य रूप से गन्ने की फसल उगा रहे हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से चीनी मिलों से अवैध कब्जे की भूमि पर उगाया गन्ना न खरीदने को कह चुका है। इसके चलते चीनी मिलें इनका गन्ना नहीं खरीद रही हैं। इन कब्जेदारों के सट्टे भी नहीं बनाए गए हैं।
उधर वनकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे अवैध कब्जेदारों पर कड़ी नजर रखें कि वे वन भूमि पर उगाया गन्ना क्रेशरों और कोल्हुओं पर भी न बेचने पाएं। यदि कोई ऐसा करता पाया जाए तो उसके वाहन को सीज कर कार्रवाई की जाए। अब दुधवा टाइगर रिजर्व अवैध कब्जे की भूमि पर उगाई गई गन्ने की फसल को वन उपज मानते हुए इससे हाथियों की दावत करेगा।
डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि अवैध कब्जे की वनभूमि पर उगाए गए गन्ने को काटने के बजाय दुधवा के पालतू हाथियों को इन खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया जाएगा। मालूम हो कि हाथियों का सबसे प्रिय भोजन गन्ना होता है। वनकर्मियों और एसटीपीएफ के जवानों की सुरक्षा में यह हाथी गन्ने की दावत उड़ाएंगे। डीडी बफर जोन ने बताया इस दावत का इंतजाम जल्दी ही किया जाएगा। यदि कोई कब्जेदार इसका विरोध करेगा तो उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।