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शहर वापस मांग रहा अपना पिकनिक स्पॉट
धन के अभाव में इंदिरा मनोरंजन वन का वजूद संकट में
वनविभाग ने जीर्णोद्धार के लिए पर्यटन विभाग को भेजा 3.94 करोड़ का प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
करीब तीस साल पहले शहर से नौ किलोमीटर दूर बनाया गया इंदिरा मनोरंजन वन रखरखाव के अभाव में वीरान हो चुका है। इसमें रखे गए हिरन, सांप आदि जानवर गायब हैं। बोटिंग पूल सूखा पड़ा है। नाले पर बना लकड़ी का खूबसूरत पुल टूट चुका है। बाल उद्यान के झूले जर्जर हो गए हैं। वन संग्रहालय, हट, स्मृति वन, जंगल सफारी आदि अपना अस्तित्व खो चुके हैं। कई बार इसके पुनरुद्धार के लिए वन विभाग ने सरकार से बजट की मांग की लेकिन सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया। इसके चलते बने बनाए एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट का वजूद संकट में आ गया है।
वर्ष 2017 के अक्टूबर माह में दक्षिण खीरी वन प्रभाग ने इंदिरा मनोरंजन वन के पुनरुद्धार के लिए तीन करोड़ 94 लाख का प्रस्ताव प्रधान मुख्य वन संरक्षक के माध्यम से पर्यटन विभाग को भेजा है। इस धनराशि से 30 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इंदिरा मनोरंजन वन की 2800 मीटर बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराने के साथ झूले, हट बोटिंग पूल आदि के पुनरुद्धार की योजना है। यदि यह धनराशि मंजूर हुई तो इंदिरा मनोरंजन वन एक बार फिर से पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित हो सकेगा।
वर्ष 1987-88 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने जिला वन पार्कों की परिकल्पना की थी। इसी के तहत दक्षिण खीरी वन प्रभाग की शारदानगर रेंज के महेवा वन ब्लॉक में इंदिरा मनोरंजन की स्थापना की गई। इसका उद्घाटन तीन दिसंबर 1988 को तत्कालीन वन मंत्री अजीत प्रताप सिंह ने किया था। इसमें सांप घर बनाने के साथ करीब एक दर्जन विभिन्न प्रजातियों के हिरन भी रखे गए थे। इसके चलते यह हिरन पार्क के नाम से भी जाना जाने लगा। इंदिरा मनोरंजन वन में बालोद्यान, बैठने के लिए हट, भ्रमण के लिए जंगल सफारी, बोटिंग पूल, वन संग्रहालय, वन चेतना केंद्र आदि पार्क का आकर्षण बने। आमतौर से तो यहां हर रोज लोग आते जाते थे लेकिन छुट्टियों के दिन तो यहां लोगों का दिन भर तांता लगा रहता था। बच्चों के लिए छुट्टियां बिताने का अच्छा पिकनिक स्पॉट था।
वर्ष 2003 तक तो यह इंदिरा मनोरंजन वन ठीक ठाक चलता रहा है। उसके बाद इसके रखरखाव के लिए धन का अभाव होने लगा। उसी समय महेवागंज तक आई बाढ़ ने इंदिरा मनोरंजन वन को भी चपेट में ले लिया। यहां पल रहे सांप और हिरन बाढ़ में गायब हो गए। पार्क के ढांचे को भी काफी नुकसान हुआ। इसके बाद से यह इंदिरा मनोरंजन वन फिर गुलजार नहीं हो सका। हालांकि मौजूदा रेंजर डीके सिंह ने अपने संसाधनों से कुछ हद तक इसे संवारने की कोशिश की लेकिन यह नाकाफी है।
इससे पहले भी प्रस्ताव बने लेकिन नहीं मिला बजट
इंदिरा मनोरंजन वन के जीर्णोंद्धार और सजाने संवारने के लिए वन विभाग ने पहले भी बजट बनाकर कई बार प्रस्ताव भेजा, लेकिन कभी मंजूरी नहीं मिली। करीब पांच साल पहले टूरिज्म कॉरिडोर के तहत इसके विकास के लिए प्रस्ताव भेजा गया लेकिन वह ठंडे बस्ते में ही पड़ा रहा। इस बार अक्टूबर माह में 3.94 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। वन विभाग को उम्मीद है कि इस प्रस्ताव को पर्यटन विभाग से मंजूरी मिल जाएगी।
सैलानियों की सुरक्षा भी एक बड़ा संकट
इंदिरा मनोरंजन वन में चारों तरफ पक्की बाउंड्री न होने से अराजक तत्व इधर-उधर से यहां आ जाते हैं। इससे पार्क में आने वाले सैलानियों की सुरक्षा को भी खतरा रहता है। अब यहां वन विभाग का स्टाफ भी स्थाई रूप से नहीं रहता। इसके चलते सुरक्षा का और ज्यादा संकट है।
इंदिरा मनोरंजन वन के जीर्णोद्धार के लिए कई बार धन की मांग की गई लेकिन धन उपलब्ध न होने से इसका रखरखाव नहीं हो पा रहा है। अक्टूबर माह में एक बार फिर 3.94 करोड़ का प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेजा गया है। यह प्रस्ताव मंजूर हुआ तो जल्दी ही इंदिरा मनोरंजन वन का जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
- समीर वर्मा, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग