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फसलों की कटाई में भी बाघों की दहशत का साया

Sat, 07 Apr 2018 07:54 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
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खीरी जिले में जंगल से सटे इलाके के गांवों में गन्ना काटते समय ही नहीं गेहूं की फसल काटने के दौरान भी बाघों का खतरा बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देखने में आया है कि गेहूं कटाई के दौरान बाघ के हमले बढ़े हैं। इन दिनों गेहूं कटाई का सीजन चल रहा है, बेलरायां, मझगई, संपूर्णानगर और धौरहरा रेंजों में बाघ की चहलकदमी से लोग परेशान हैं। पिछले दो वर्षों में गेहूं काटने के दौरान बाघ हमले में चार लोगों की मौत हुई तो चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने में बाघों के प्रजनन और बच्चे पैदा करने का समय होता है। ऐसे समय में प्राय: बाघों के जोड़े जंगल से बाहर आ जाते हैं। बाघिन के बच्चे छोटे होने के कारण बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर बाघिन जंगल की अपेक्षा बाहर रहना ज्यादा पसंद करती है। इन सब कारणों से गेहूं काटने के सीजन में बाघों का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों भी जंगल से सटे इलाके में बाघ जंगल से बाहर चहलकदमी करते हुए भ्रमण कर रहे हैं।
हाल ही में बाघ संपूर्णानगर में एक ग्रामीण और मझगईं रेंज में एक महिला पर हमला कर घायल कर चुके हैं। बेलरायां रेंज में एक बाघ और एक बाघिन लगातार दहशत का पर्याय बनी हुई है। धौरहरा रेंज अंतर्गत कैरातीपुरवा गांव में बाघ आबादी के पास तक आ पहुंचा था। इस तरह मार्च माह से कई बाघ जंगल से बाहर भटक रहे है। बाघों के डर से जंगल से सटे इलाके में लोग गेहूं मसूर आदि काटने के लिए जाने से भी डर रहे हैं।
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बाघ हमले में दो साल केे अंदर चार मौतें
गेहूं की फसल तैयार होने और कटने के सीजन में पिछले दो साल के अंदर जिले में चार लोग बाघ का निवाला बने तो चार लोग बाघ हमले में गंभीर रूप से घायल हुए।

27 फरवरी 2016-मैलानी रेंज की सलेमपुर बीट में कुकरा निवासी रईस अहमद की बाघ हमले में मौत।
28 मार्च 2016-मैलानी रेंज की जटपुरा बीट में गेहूं फसल की रखवाली कर रहे सोनहरा भूड़ निवासी 85 वर्षीय तरसेम सिंह की बाघ हमले में मौत।
16 अप्रैल 2016-मैलानी रेंज के ढाका गांव में गेहूं काट रही 20 वर्षीया किरन की बाघ हमले में मौत।
13अप्रैल2017-महेशपुर रेंज के घमहाघाट जंगल के पास पसियापुर गांव निवासी 40 वर्षीय शर्मालाल की मौत।
07 मई 2017-मैलानी रेंज नहर पटरी पर जा रहे चार लोगों पर आधे घंटे के अंदर बाघ का चार लोगों पर हमला। इसमें बांकेपुर निवासी 30 वर्षीया मैना देवी और उसकी दो मासूम बेटियां शिवानी और सपना के अलावा रमतलिया निवासी 60 रामकिशुन घायल।

बाघों के जंगल से बाहर निकलने का कोई सीजन नहीं होता बल्कि परिस्थितियां होती हैं। जंगल में बाघों की आबादी बढ़ने और जंगल के बाहर खेतों में बाघों को समृद्ध हैबिटेट मिलने से बाघ जंगल से बाहर आ रहे हैं। वन विभाग बाघोें की लगातार निगरानी करता है। जंगल से सटे गांव के लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिए।
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- डॉ. अनिल पटेल, उपनिदेशक, बफर जोन दुधवा टाइगर रिजर्व
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