जंगल से सटे गन्ने के खेतों को सर्दियों के मौसम में बाघ अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल कर लेते हैं। आमतौर से देखा गया है कि जाड़े के मौसम में इंसानों और बाघों के बीच टकराव की घटनाएं ज्यादा होती हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो गन्ने की फसल तैयार होने पर बाघों को जंगल से अच्छा प्राकृतिक आवास और वातावरण गन्ने के खेतों में मिलता है। यही कारण है कि जंगल से निकलकर बाघ गन्ने के खेतों में अपना डेरा बना लेते हैं।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और मोहम्मदी रेंज वन क्षेत्र में पिछले 21 माह के अंदर 15 लोगों को बाघों ने अपना निवाला बनाया और इससे अधिक लोगों पर हमला कर घायल किया। पिछले साल जुलाई-अगस्त में एक बाघ का काफी आतंक रहा। उसने मैलानी रेंज से सटे गांवों में नौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। बाद में वन विभाग ने उसे मौत/ आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कई दिनों की जद्दोजहद के बाद आतंकी बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर लखनऊ चिड़ियाघर ले जाया गया। जहां पर वह अपने गुनाहों की सजा काट रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते हैं कि बाघों का सबसे पसंदीदा प्राकृतिक आवास नरकुल की ऊंची-ऊंची घास होती है। नरकुल की घास और गन्ने के खेतों में खास फर्क नहीं होता। इसके अलावा गन्ने की फसल तैयार होने पर बड़ी संख्या में शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीव आदि आ जाते हैं। इससे बाघों को अपना पसंदीदा भोजन जंगल से ज्यादा खेतों में मिलता है। इसके चलते गन्ने के खेत तकरीबन तीन माह तक बाघों के अधिकार में रहते है। इस दौरान गन्ना काटने और खेतों में शौच जाने वाले बाघों का निवाला बन जाते हैं। खेतों से बाघों के निकलने पर पालतू पशु इनका शिकार बन जाते है।
यह बाघों का मीटिंग का सीजन है
सर्दियों की शुरूआत से ही बाघों का मीटिंग सीजन शुरू हो जाता है, जो दिसंबर तक चलता है। बाघ एक शर्मीला जानवर होता है। मीटिंग के लिए वह नरकुल के जंगल या गन्ने के खेत को चुनता है। चूंकि बाघ इस समय जोड़े में रहता है, इसलिए इस सीजन में हमल बढ़ जाते हैं।
- डॉ. वीपी सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ
बाघ के हमलों का दंश झेलने को मजबूर हैं ये इलाके
दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन में शामिल बांकेगंज इलाके से सटे मैलानी रेंज के गांवों सोहनरा भूड़, जटपुरा, पहाड़नगर, ढ़ाका, हरदुआ, कुरियानी, भरिगवां, महुरैना, पसियापुर, बूधरपुर आदि के ग्रामीण बाघों के हर माह होने वाले हमलों का दंश झेलने को मजबूर हैं। बाघ के ताबड़तोड़ हमलों से परेशान लोगों का कहना है कि इससे पहले सर्दियों के मौसम में बाघ हमले की घटनाएं अधिक होती थी। अब तो हर मौसम में बाघों के हमलों का खतरा उनके सर पर मंडराया करता है। बाघ हमलों के डर से उनकी खेतीबाड़ी चौपट हो गई है। शाम होने से पहले ही लोग घरों में दुबककर बैठ जाते हैं।
बाघों की लोकेशन पर नजर रखने के लिए जंगल के बाहरी किनारों पर भी कैमरे लगवाए जाएंगे। साथ ही बफरजोन में ग्रासलैंड विकसित किया जाएगा, ताकि बाघों के जंगल से बाहर निकलने की स्थिति ही न पैदा हो। इसके अलावा मैलानी रेंज की जटपुरा बीट में बाघ के हमले में घायल हुए युवक जितेंद्र को वन विभाग की ओर पांच हजार रुपये का चेक दिया जाएगा। ग्रामीणों से अपील है कि वन्यजीवों के हमलों से बचाव के लिए जंगल के अंदर न जाएं।
- अनिल पटेल, डीएफओ/ उपनिदेशक, बफरजोन, दुधवा टाइगर रिजर्व
मैलानी और मोहम्मदी रेंज में हुईं घटनाएं
हाल ही में दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन में शामिल मैलानी और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में बाघ ने कहर बरपाते हुए 21 माह के अंदर 15 लोगों को मौत के घाट उतारने के साथ ही कई ग्रामीणों पर हमला कर गंभीर घायल किया था। रविवार मोहम्मदी रेंज की महेशपुर बीट में 40 वर्षीय प्रकाश नामक युवक पर हमला कर उसे अपना 15वां शिकार बनाया था।