लखीमपुर खीरी। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और भीरा रेंज के बाद अब मोहम्मदी वन क्षेत्र में भी बाघों का आतंक बढ़ता जा रहा है। पिछले सात माह के अंदर तीन लोग बाघों के हमले का शिकार हो चुके है। यह सभी हमले जंगल के बाहर कठिना नदी के आस-पास हुए है। शनिवार की सुबह बाघ के हमले की यह घटना महेशपुर मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर हुई। आबादी की ओर बढ़ते बाघ के कदमों से इलाके के लोग दहशत में आ गए हैं। मोहम्मदी रेंज में आंवला जंगल से सटकर बहने वाली कठिना नदी बाघों की पसंदीदा सैरगाह रही है। कभी यहां पर बाघों की अच्छी संख्या थी, लेकिन जंगल में अतिक्रमण होने से यहां बाघों की आबादी कम तो हुई है, लेकिन अब भी यहां बाधों की पर्याप्त संख्या है। यह बात बाघों की लोकेशन जानने के लिए लगाए गए कैमरों में ट्रैप हुई तस्वीरों से साबित हो चुकी है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह का मानना है कि कठिना नदी किनारे आंवला जंगल में भोजन, पानी और प्राकृतिक आवास के लिए अनुकूल वातावरण मिलने से यहां बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। जंगल क्षेत्र कम होने से बाघ जंगलों से बाहर आकर खेतों तक में अपना बसेरा बना रहे हैं। ऐसे में जंगल से सटे इलाके में खेती-बाड़ी करने और पशुओं का चारा लेने जाने वाले लोगो पर इनका हमला स्वाभाविक है। इधर इन हमलों में बढ़ोतरी हुई है। लगता है बाघों ने खेतों को भी अपनी टैरीटरी में शामिल कर लिया है। इससे बाघ यहां इंसानी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर रहा है।
उधर मोहम्मदी रेंज से सटे गांवों में बाघ हमलों की ताबड़तोड़ घटनाओं से लोगों का खेती-बाड़ी करना, रास्तों पर निकलना दुश्वार हो गया है। जंगल से सटे इलाके के गांवो पसियापुर, रामपुर, काशीपुर, सिरदारपुर, त्रिलोक पुर, सिंगहा, अयोध्यापुर, मुल्लापुर, लक्ष्मनपुर आदि के ग्रामीणों प्रधान हंसराम, राजेंद्र प्रसाद, रामसरन, रामदामस, जब्बार अली, प्रेमचंद्र, सीताराम आदि का कहना है बाघ के हमलों के डर से उनकी खेती-बाड़ी चौपट हो गई है। बाघ के खौफ से ग्रामीण शाम ढलने से पहले ही घरों में दुबक कर बैठ जाते है।
इसके अलावा ग्रामीण बच्चों को स्कूल भेजने तक से कतराने लगे है। बावजूद इसके वन विभाग के अधिकारी बाघ के हमलों से बचाव के कोई ठोस इंतजाम नहीं कर पा रहे है। शनिवार सुबह एक बार फिर जंगल से सटे इलाके अशर्फीगंज के मूड़ा गांव निवासी राजेंद्र के युवा पुत्र लालाराम (24) पर खेतों में छिपे बैठे बाघ ने हमला कर उसे अपना निवाला बना लिया। बाघ हमले में लालाराम की हुई मौत से गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि बाघ हमलों की बढ़ रही घटनाओं से लोग असुरक्षित हैं।
उधर बाघ हमले में युवक की हुई मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों के रोड जाम की सूचना पर पहुंचे एसडीएम (गोला) डॉ योगानंद पांडे और तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने बताया कि बाघ हमले में मारे गए लालाराम के परिवारीजनों को मुख्यमंत्री सर्वहित किसान बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये मुआवजा का आवेदन मिलने पर अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
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मोहम्मदी रेंज में पिछले सात माह के अंदर हुईं बाघ हमले की घटनाएं...
- 13 अप्रेल 2017- मोहम्मदी रेंज की महेशपुर बीट के घमहाघाट जंगल में देवियापुर निवासी शर्मा (40) नामक युवक की बाघिन के हमले में मौत।
- 28 अगस्त 2017 मोहम्मदी रेंज के घमहाघाट जंगल से बांकेगंज ब्लॉक की पंचायत ग्रंट डाटपुर के मजरा पसियापुर निवासी नरायन लाल (52) की बाघ हमले में मौत। - 21 अक्तूबर 2017 महेशपुर बीट में अशर्फीगंज के भूड़ा गांव निवासी लालाराम (24) की बाघ हमले में मौत।
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कोट.....
ग्रामीणों को सलाह है कि बाघ हमलों से बचाव के लिए खेतों की तरफ समूह बनाकर हल्ला मचाते हुए जाए। गन्ना काटते समय पूरी सावधानी बरतें। कर्मियों को बाघ की लगातार मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं फिर भी सतर्कता बरतना बेहतर होगा।
-समीर कुमार, डीएफओ साउथ खीरी