गोला गोकर्णनाथ। पौराणिक शिव मंदिर में बन रहे कॉरिडोर की भव्यता अब दिखने लगी है। कहीं नक्काशीदार लाल बलुआ पत्थर परिसर की सुंदरता बढ़ा रहे हैं तो कहीं दीवारों पर भगवान शिव की महिमा और नटराज की कलाकृति उकेरी गई है।
108 स्तंभों पर बन रहे परिक्रमा पथ की फॉल्स सीलिंग लगभग पूरी हो चुकी है। पंखे भी लगाए जा चुके हैं। कार्यदायी संस्था का दावा है कि कॉरिडोर का 85 फीसदी काम पूरा हो गया है। परिक्षेत्र के रास्तों को छोड़कर दिसंबर तक निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत 69.15 करोड़ रुपये की लागत से कॉरिडोर का निर्माण दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के जेई अजय प्रताप सिंह और विवेक बाजपेई की देखरेख में काम कराया जा रहा है। मुख्य द्वार से मुख्य मार्ग पर मंडूक फ्लोरिंग की जा रही है। इसमें लगातार ठंडा पानी बहने की व्यवस्था होगी, जिससे गर्मी में श्रद्धालुओं को नंगे पांव चलने पर शीतलता मिलेगी।
नौ मीटर चौड़ा होगा वीआईपी मार्ग
वीआईपी द्वार से मिल रोड स्थित आंबेडकर तिराहे को जोड़ने वाला मार्ग नौ मीटर चौड़ा होगा। इस पर पीसीसी का काम पूरा हो चुका है। विश्वकर्मा चौराहे से अंबेडकर तिराहा, शिवम चौराहा और मुख्य द्वार के सामने से पीलीभीत धर्मशाला मोड़ तक कॉरिडोर मार्ग आरसीसी का रहेगा।
कॉरिडोर के मुख्य द्वार से परिक्रमा पथ तक पाथवे और फर्श का काम चल रहा है। परिक्रमा पथ में अन्य मंदिरों का पुनर्स्थापन हो चुका है। मुख्य द्वार से लगी रिटेनिंग वॉल पर भगवान शिव की महिमा से संबंधित छह म्यूरल्स और नटराज की कलाकृति उकेरी जा चुकी है। दीवार के दूसरे हिस्से पर शिव स्त्रोत मंत्र उकेरे गए हैं।
गोकर्ण तीर्थ के चारों ओर पाथवे, चबूतरों और सीढ़ियों की फर्श पर नक्काशीदार लाल बलुआ पत्थर लगाया जा चुका है। पौराणिक शिव मंदिर के करीब 2000 मीटर परिक्षेत्र मार्गों पर त्रिशूल-डमरू युक्त 300 से अधिक आकर्षक कंड्यूट लाइटें लग चुकी हैं। परिक्षेत्र के मार्गों का निर्माण भी शुरू हो गया है।
यात्री हॉल और कैफेटेरिया की फिनिशिंग जारी
मुख्य द्वार के सामने गोकर्ण तीर्थ के दक्षिण ओर तीन मंजिला यात्री हॉल और कानपुर धर्मशाला परिसर में तीन मंजिला कैफेटेरिया भवन की अंतिम छत पड़ चुकी है। दोनों भवनों में बाल पुट्टी, वायरिंग, पानी की पाइपलाइन और फर्श का काम चल रहा है। स्टेशन रोड से कॉरिडोर के मुख्य द्वार और विधायक आवास के पास वीआईपी द्वार पर भी फिनिशिंग की जा रही है।
मुख्य द्वार के पास जूते-चप्पल रखने के लिए रैक बनाई जा रही है। वहीं, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। मुख्य द्वार से मुख्य मार्ग पर श्रद्धालुओं को नंगे पांव प्रवेश दिया जाएगा। द्वार के बाईं ओर पाथवे बनाया गया है, जहां निरीक्षण आदि के समय लोग जूते-चप्पल पहनकर जा सकेंगे। दाईं ओर दिव्यांगों के लिए रैंप बनाई गई है।
सात हजार वर्ग फीट में विकसित होगा हरित परिक्षेत्र
पौराणिक शिव मंदिर के पीछे करीब 7000 वर्ग फीट में हरित परिक्षेत्र विकसित किया जाएगा। गोकर्ण तीर्थ के तट पर प्लांटर तैयार किए गए हैं, जिनमें औषधीय पौधे रोपे जाएंगे।
सीडीओ योगानंद पांडेय ने बताया कि कॉरिडोर का काम तेजी से कराया जा रहा है। इसकी लगातार समीक्षा की जा रही है।
फोटो= कॉरिडोर के परिक्रमा पथ में लगाई जा रही जाली। संवाद
फोटो= कॉरिडोर के परिक्रमा पथ में लगाई जा रही जाली। संवाद