उल्लू की हिफाजत को लेकर पार्क प्रशासन अलर्ट
दिवाली पर उल्लू की होगी खास निगहबानी
मैलानी। दिवाली के त्योहार को देखते हुए दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने अलर्ट घोषित कर दिया है। खासकर उल्लू की निगहबानी को पार्क प्रशासन चौकन्ना है, क्योंकि दिवाली पर उल्लू की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में इसके शिकार की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए अलर्ट घोषित किया गया है।
दुधवा नेशनल पार्क एरिया में उल्लू की 11 प्रजातियां पाई जाती हैं। उल्लू को लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। दिवाली के मौके पर लोग सिद्धि और बलि के चक्कर में उल्लू का शिकार करते हैं। लिहाजा इसे देखते हुए आजकल उल्लू के शिकार की संभावनाएं अधिक बढ़ जाती हैं। पार्क के डीडी महावीर कौजलगि बताते हैं कि उल्लू को पक्षियों की उच्च स्तरीय सुरक्षा की श्रेणी में रखा गया है। इसीलिए दिवाली पर इसके शिकार की संभावनाओं को देखते हुए पार्क एरिया में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। इसके तहत पार्क एरिया के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों जिन पेड़ों पर उल्लू के होने की संभावनाएं अधिक हैं, वहां पर खास निगरानी के निर्देश स्टाफ को दिए गए हैं। एक भी उल्लू का शिकार न होने पाए, इस बात की पूरी कोशिश की जा रही है।
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यह है अलर्ट
मैलानी। डीडी महावीर कौजलगि के मुताबिक अलर्ट के तहत स्टाफ को वाचफुल रहने, सूचनातंत्र को मजबूत करने, उल्लू के शिकारियों, खरीदारों की सुरागरसी करने, पुराने अपराधियों पर नजर रखने आदि सहित विभिन्न तरीके के निर्देश दिए गए हैं।
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उच्च स्तरीय सुरक्षा का पक्षी है उल्लू
मैलानी। पार्क के डीडी महावीर कौजलगि के अनुसार उल्लू को पक्षियों की उच्च स्तरीय सुरक्षा की श्रेणी में रखा गया है। लिहाजा हमेशा ही इसकी खास निगहबानी की जरूरत रहती है।
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उल्लू के शिकार पर है तीन साल की सजा
मैलानी। डीडी कौजलगि बताते हैं कि उच्च स्तरीय सुरक्षा श्रेणी का पक्षी होने की वजह से उल्लू का शिकार करते पकड़े जाने पर वन्यजीव एक्ट में तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
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अलर्ट के दौरान जंगल में न जाएं लोग
मैलानी। दुधवा पार्क के डीडी महावीर कौजलगि ने कहा कि मौजूदा समय में अलर्ट घोषित किया गया है, लिहाजा ऐसे में लोग जंगल में न जाएं। जंगल में घूमते मिलने पर कतई बख्शा नहीं जाएगा। जंगल एवं इसके आसपास घूमने वाले संदिग्ध लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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वर्जन
हर त्योहारों पर अलर्ट घोषित किया जाता है। इसी तरह इस बार भी दिवाली पर अलर्ट है। दिवाली पर सिद्धि आदि के चक्कर में उल्लू के शिकार की संभावनाएं अधिक रहती हैं। इसे देखते हुए स्टाफ को इस समय खासकर उल्लू की सुरक्षा, इसके शिकारियों, खरीदारों, पुराने अपराधियों पर नजर रखने की हिदायतें दी गई हैं।
महावीर कौजलगि, उप निदेशक, दुधवा नेशनल पार्क