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बाघ की दहाड़ सुन सहमे ग्रामीण, नहीं गए जंगल की ओर

Wed, 04 Apr 2018 07:36 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
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टाइगर
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मंगलवार को जंगल से लकड़ी बीनने गई महिला पर बाघ के जानलेवा हमले के बाद घटनास्थल की तरफ गांव वालों का जाना बंद हो गया है। वहीं, दूसरे दिन भी ग्रामीणों को बाघ की दहाड़ सुनाई दी हैं। बाघ की दहाड़ सुनकर ग्रामीणों में दहशत है। उधर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की तरफ से लोगों को घटनास्थल की तरफ जाने से मना किया गया है। साथ ही जंगल की ओर लकड़ी आदि बीनने की भी मनाही की गई है।

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बता दें कि मंगलवार की दोपहर त्रिलोकपुर निवासी बुजुर्ग महिला राशिदा खातून पर गुलरा की पार्क चौकी के पास जंगल के अंदर जलौनी लकड़ी बीनते समय बाघ ने हमला बोलकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। मंगलवार शाम और बुधवार सुबह घटनास्थल के पास से गांव के लोगों को बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनाई पड़ी। जिससे इलाके में दहशत बढ़ गई। उधर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम भार्गव ने लोगों से घटनास्थल की तरफ जाने से मना किया है। बताया कि शिकार न मिलने से बाघ इंसानों पर फिर हमला कर सकता है। घटना के बाद से ग्रामीण सहमे हुए हैं।

बाघ के पगचिह्न देखकर ग्रामीण भयभीत
पलिया। भीरा क्षेत्र में भी बाघ की दहशत फैली हुई है। इमलिया फार्म, नानक फार्म के साथ ही कई ऐसे गांव हैं जहां बाघ की दहशत से ग्रामीणों में खौफ है। खेतों की तरफ जाने वाले कई ग्रामीणों ने इमलिया फार्म के पास बाघ के पगचिह्न भी देखे हैं, जिससे वह खेतों की तरफ जाने से कतराने लगे हैं। गन्ना खेतों में खड़ा होने के कारण कुछ दिखाई न पड़ने से बाघ कहां से हमला कर दे इसके कारण ही ग्रामीण अभी खेतों की तरफ नहीं जा रहे हैं।
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तीन गांवों में फैली है बाघ की दहशत
महंगापुर। लगदहन में गन्ना छीलने गए युवक पर बाघ द्वारा किए गए हमले के बाद से तीन गांवों में बाघ की दहशत अब भी फैली हुई है। इलाके के परसपुर, लगदहन और बाजपुर के ग्रामीणों में बाघ का खौफ है तथा वह भी खेतों पर जाने से कतराने लगे हैं। मजदूर पेशा ग्रामीण भी दूसरों के खेतों में गन्ना छीलने नहीं गए हैं। उधर ग्रामीणों का रोष वन विभाग के खिलाफ अब भी व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया कि इतना सबकुछ होने के बाद अभी तक वन विभाग की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जिससे ग्रामीण अपने-अपने खेतों की तरफ नहीं जा पा रहे हैं।

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