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जंगल के रास्तों पर तेज रफ्तार वाहन,बन रहे दुर्लभ वन्यजीवों का काल

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जंगली रास्तों पर वाहनों की रफ्तार
ले रही वन्यजीवों की जान
- रास्ता खाली होने से वाहन चालकों को नहीं रहना गति सीमा का ध्यान
- विभिन्न हादसों में बाघिन समेत दर्जनों जानवरों की हो चुकी है मौत
अनिल मिश्र
बांकेगंज।
किशनुपर सेंक्चुुरी और दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन से गुजरने वाले रास्तों पर वाहनों की तेज रफ्तार दुर्लभ वन्यजीवों के लिए काल बन रही है। इन रास्तों पर गति सीमा से अधिक रफ्तार से दौड़ने वाले वाहनों की चपेट में आकर एक बाघिन समेत दर्जनों हिरन और बंदरों की मौत हो चुकी है। हादसे करने वाले वाहन बहुत कम ही पकड़ में आते हैं। वन विभाग सिर्फ अज्ञात वाहन चालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। वाहन पकड़ में न आने के कारण कार्रवाई के मामले में विभाग लाचार नजर आता है।
तराई के जंगल से होकर कई प्रमुख रास्ते गुजरते हैं। इनमें पलिया से वाया मैलानी, गोला, दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी और बफरजोन में शामिल मैलानी, भीरा रेंज के घने जंगलों के बीच से होकर गुजरने वाली सड़कों पर दिन में ही नहीं रात में भी वाहनों का आवागमन बना रहता है। तेज हार्न बजाते हुए तेज रफ्तार से गुजरते इन वाहनों की चपेट में आकर पिछले पांच साल में एक बाघिन समेत दर्जनों हिरन, बंदर, मोर, नीलगाय, बारासिंगा, जंगली सुअर आदि दुर्लभ वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। इसी तरह खुटार-संसारपुर, कुकरा-भीरा, मैलानी-खुटार आदि मार्गों पर कई दुर्लभ वन्यजीव मौत के मुंह में समा चुके हैं।
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वन विभाग ने वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की चेतावनी वाले संकेतक बोर्ड लगवा रखे है। बावजूद इसके वाहन चालक इनकी परवाह किए बिना फर्राटे से वाहन चलाते हैं। रोड पर कई जगह वन चौकियां भी स्थापित हैं। इन चौकियों के सामने से वाहन फर्राटा भरते गुजर जाते हैं। वन विभाग के कर्मचारी उन्हें रोकने या गतिसीमा में चलने को कहें तो वाहन चालक उनके साथ मारपीट करने को उतारू हो जाते हैं।

वन्यजीवों के मरने की प्रमुख घटनाएं
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी-भीरा रोड पर जुलाई 2012 में टाटा 407 से एक मादा बाघिन, जनवरी 2016 में मिनी बस की टक्कर से नर पाढ़ा, 24 जनवरी 2018 टैंकर की टक्कर से मादा चीतल की मौत हो चुकी है। इसके अलावा अगस्त 2011, नवंबर और दिसंबर 2013 में अज्ञात वाहनों की टक्कर से क्रमश: बंदर, चीतल और नर पाढ़ा की मौत हो चुकी है। हालांकि तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर से दुर्लभ वन्यजीवों की मौत के मामले में दुधवा पार्क प्रशासन की पकड़ में आए तीन वाहनों को सीज कर उनके खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। सीज किए गए वाहन किशनपुर सेंक्च्रुरी की मड़हा बीट में खड़े सड़ रहे है।
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जंगल से गुजरने वाले रास्तों पर वाहनों की रफ्तार को सीमिति रखने को पार्क प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग से समन्वय बनाया जा रहा है। पलिया की ट्रांसपोर्ट कंपनियों और ट्रेवल एजेंसियों को भी इस आशय के पत्र लिखे गए हैं। संबधति मार्गों पर स्पीड ब्रेकर बनवाने के लिए डीएम से अनुमति ली जाएगी। दुर्घटना में वन्यजीवों की मौत होने पर पकड़े गए वाहनों के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है।
- महावीर कौजलगि, उप-निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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