लखीमपुर खीरी।
ऐतिहासिक दशहरा मेला के सांस्कृतिक मंच पर आठवें दिन पंजाबी संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डूडा के परियोजना अधिकारी राजेश पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अधिशासी अधिकारी अखिलेश त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
पंजाब से आए गुरसेवक पप्पू और इंटरटेनमेंट ग्रुप के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक मनमोहक कार्यक्रम पेश किए। अमरीश पुरी ने अपने संचालन से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। रमनदीप और कुलदीप गिल ने गुरुनानक जी की याद में पढ़ा- का तो बाबा खो लिया साथों ननकाना। समूह नृत्य भांगड़ा पर- शूरमा है वह गबरू जवान बई और काला चश्मा जचदा ए गीत गाकर कलाकारों ने दर्शकों में जोश भरा।
जुत्ती पटियाले दी नृत्य पर मुस्कान ने खूब तालियां बटोरी। गुरसेवक के सांडे पिंड दे मुंडे ने बड़े अथरेनी, पटियाला पैग ला छड्डी दा। और जट दा पजामा कुड़े उच्चा हो गया। गीतों को दर्शकों ने खूब सराहा। पग वाला मुंडा कइदी बड़ा जचदा। तेरे झांझरा दे बोल कहदे यह बोल, जैसे गीत भी श्रोताओं ने खूब पसंद किए। युवा कलाकारों ने गीत गाकर श्रोताओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
पहिले ललकारे नाल मैं दुर गई दूजे ललकारे मैं अंदर बड़ गई और बिल्लो ठुमका लगा सानू सबको नचा गीत पर दर्शक खूब नाचे। भारी संख्या में सिख समुदाय के लोगों ने पंजाबी संगीत का आनंद लिया। इस मौके पर जोगिंदर सिंह चावला, रसपाल सिंह गिल, शीतल सिंह, इंद्रवीर सिंह, पदम कुमार अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक आदि मौजूद रहे।