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दुधवा के बफर जोन में सक्रिय हैं शिकारी

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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन विशेषकर मैलानी और भीरा रेंज के जंगल शिकार के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील हैं। इन दोनों रेंजों में घने जंगल होने के कारण बाघ, तेंदुआ, जंगली सुअर और हिरन की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। कोरजोन की अपेक्षा बफरजोन में सुरक्षा प्रबंधों की कमी के कारण शिकार के लिए इस इलाके की संवेदनशीलता बढ़ गई है। जंगल के अंदर और जंगल के बाहर सैकड़ों गांव बसे हुए हैं। इन गांवों के लोगों का जंगल में नियमित आना जाना होता है। ये लोग कभी जलौनी लकड़ी तो कभी कटरुआ व धरती के फूल के तो कभी घास-फूस लेने के लिए जंगल में जाते हैं। इस दौरान मौका मिलने पर वन्यजीवों का शिकार भी कर लेते हैं।
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बफर जोन का यह इलाका लंबे अरसे से अंतरराष्ट्रीय शिकारियों और वन्यजीव तस्करों के निशाने पर है। इसी साल एसटीपीएफ, एसओजी और वन कर्मियों की टीम ने खटीमा से दो शिकारियों को पकड़ा था। उसमें से एक शिकारी गोला कोतवाली क्षेत्र के कमलापुर का तो दूसरा थाना मैलानी क्षेत्र के ढाका गांव का निवासी था। उनके पास से बाघ की एक खाल और हड्डियां बरामद हुई थीं। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने बाघ का शिकार दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज में बांकेगंज से सटे बरौंछा नाले किनारे अर्जुन के जंगल से किया था। इससे पहले भी कई शिकारी कुड़का लगाते और शिकार करते पकड़े जा चुके हैं। यहीं नहीं करीब 10 साल पहले मैलानी रेंज में ही अर्जनपुर गांव के कुछ युवकों ने कुड़के में फंसे एक बाघ को लाठी-डंडों से पीट-पीट कर मार डाला था। उसकी खाल और हड्डियां निकाल कर बेचने जा रहे थे तभी वन विभाग की टीम ने सूचना मिलने पर उन्हें धर दबोचा था।
सर्दियों में बाघों के जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में आने की घटनाएं सबसे ज्यादा इसी इलाके में होती हैं। जंगल से बाघों के निकलते ही ये शिकारियों के निशाने पर आ जाते हैं। शातिर शिकारी स्थानीय लोगों की मदद से गन्ने के खेतों में बाघ का शिकार कर उनकी खाल, हड्डियां, दांत, नाखून आदि निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच देते हैं। मांस को या तो गड्ढा खोदकर गाड़ दिया जाता है या उसे सुखाकर बेच देते हैं। कई बार शिकारियों के पकड़े जाने पर पूछताछ में मैलानी, भीरा और संपूर्णानगर रेंज में बाघों और तेंदुओं के शिकार की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। भीरा, मैलानी रेंज के डीटीआर बफरजोन में शामिल होने के बाद सुरक्षा प्रबंध पुख्ता किए गए हैं। इसके चलते हाल में शिकार की कोई घटना प्रकाश में नहीं आई है। इसके बावजूद शिकार के लिहाज से इस क्षेत्र की संवेदनशीलता से इनकार नहीं किया जा सकता। इस बात को वन विभाग के अधिकारी भी मानते हैं। यही कारण है कि पूरे टाइगर रिजर्व में कहीं भी शिकारियों का पता लगने पर बफरजोन में पेट्रोलिंग बढ़ाने के साथ कड़े सुरक्षा प्रबंध किए जाते हैं।
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शिकार और कटान रोकने में जा चुकी वन रक्षक की जान
शिकार और पेड़ों के कटान पर सख्ती बरतने पर पेशेवर वन अपराधियों ने मैलानी रेंज की जटपुरा और महुरेना बीट में गश्त के दौरान वन रक्षक सुखपाल सिंह की 19 अक्तूबर को हत्या कर उसे रास्ते से ही हटा दिया। ढाई माह गुजर जाने के बाद भी पुलिस मुख्य आरोपी बांकेगंज से सटे पसियापुर गांव निवासी रमेश को अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। यह आरोपी शातिर शिकारी और पेशेवर वनापराधी है। बताया तो यहां तक जाता है उसके तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों से जुड़े हुए हैं।

डीटीआर बफरजोन की मैलानी, भीरा और संपूर्णानगर रेंज वन अपराध के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। इसके लिए लगातार पैट्रोलिंग कराई जा रही है। बफरजोन में पिछले एक साल के अंदर शिकर करने का प्रयास करते हुए कई शिकारी पकड़े गए हैं।
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- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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