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सीमा से जुड़े रास्तों से हो रही है जंगल में घुसपैठ

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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार में इंटरनेशनल गोल्फर के शिकार करते पकड़े जाने के बाद दुधवा में सुरक्षा की खामियों पर एक बार फिर से चिंतन शुरू हो गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व की उत्तरी सीमा नेपाल से मिलती है। भारत के विभिन्न हिस्सों को जोड़नेे के लिए कई रास्ते जंगल से होकर गुजरते हैं। इन मुख्य रास्तों के अलावा भी कई रास्ते हैं जिन पर न वन विभाग की नजर रहती है न अन्य सुरक्षा बलों की। जंगल में सबसे ज्यादा इन्हीं रास्तों से घुसपैठ होती है।
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वन्यजीव अंगों का सबसे बड़ा बाजार चीन और तिब्बत है, जो नेपाल के रास्ते होते हुए गुजरता है। इसके चलते नेपाल की खुली सीमा शिकार और वन्यजीव अंगों और जड़ी बूटियों के परिवहन के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील है। जंगल से होकर निकले इन रास्तों पर गुजरने वाले सभी लोगों की जांच पड़ताल कर पाना बेहद मुश्किल है। इसी का फायदा उठाकर शिकारी, लकड़कट्टे वन्यजीव और जड़ी बूटियों के तस्कर और वन अपराधी जंगल में घुसपैठ कर अपराधों को अंजाम देते हैं।
किसी तरह की मुखबिरी होने पर ही वन विभाग, पुलिस, एसएसबी और सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध वाहनों की चेकिंग करती हैं। कई बार इस तरह की चेकिंग में शिकारी और तस्कर पकड़ में भी आए हैं। कर्तनियाघाट के मोतीपुर रेंज में ज्योति रंधावा की शिकार करते समय गिरफ्तारी होने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन अपनी जांच में सबसे ज्यादा जोर इसी बिंदू पर दे रहा है कि आखिर इन शिकारियों ने जंगल में घुसपैठ की किस रास्ते से की।
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अब दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने सीमा से जुड़े जंगल के रास्तों की निगरानी तेज कर दी है। मुख्य रास्तों के अलावा उन रास्तों को भी चिह्नित किया जा रहा है जो आम तौर पर प्रचलित नहीं हैं। जिनका इस्तेमाल जंगल में और जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोग नेपाल आने-जाने में करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर जंगल में और जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों का इस्तेमाल कैरियर के रूप में मामूली रकम देकर करते हैं।

जंगल और जंगल के आसपास बसे हैं कई गांव
दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल के अंदर कई गांव बसे हैं। इसके अलावा जंगल के आसपास सैकड़ों गांव बसे हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी इनकी जंगल पर निर्भरता कम नहीं हो पाई है। जंगल में इनका आना जाना सामान्य बात है। इनकी आड़ में वन अपराधी भी जंगल में घुसपैठ कर जाते हैं। इनको अलग से चिह्नित कर पाना मुश्किल होता है। अंतरराष्ट्रीय वन अपराधियों को जब जंगल में किसी अपराध को अंजाम देना होता है तो वे जंगल में बसे इन्हीं गांवों को अपना अड्डा बनाते हैं।

नेपाल सीमा से जोड़ने वाले जंगल के रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई है। मुख्य रास्तों के अलावा जंगल के अन्य रास्तों पर भी गुजरने वाले लोगों की छानबीन की जा रही है। वनकर्मियों के साथ एसटीपीएफ के जवान भी वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में पूरी तरह मुस्तैद हैं।
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- महावीर कौजलगि, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
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