चलतुआ गांव के करीब फिर पहुंचा बाघ
वन विभाग की लगातार निगरानी के बावजूद दहशत में हैं ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी कोरजोन जंगल से सटे चलतुआ गांव के पास सक्रिय बाघ को बुधवार शाम गांव से 500 मीटर दूरी पर उल्ल नदी किनारे बैठा देखा गया। वन विभाग ने इस बाघ को बड़े जंगल में खदेड़ने का दावा किया था।
किशनपुर सेंक्चुरी कोरजोन एरिया से सटे चलतुआ गांव में पिछले सप्ताह जंगल से निकल कर एक बाघ आबादी के निकट आ पहुंचा था। इस बाघ ने पास के गन्ने के खेत में डेरा डाल रखा था। इस बीच बाघ ने एक कुत्ते का शिकार किया और कुत्ते को बचाने के प्रयास में युवक पर हमला कर घायल कर दिया था। आबादी के निकट बाघ की मौजूदगी के चलते वन विभाग की टीमें और एसटीपीएफ के जवान इसकी निगरानी में लगे हुए थे। कांबिंग के दौरान गन्ने खेत में छिपे बैठे इस बाघ ने एक हाथी पर भी हमला किया था। पांच दिन बाद वन विभाग ने दावा किया था कि बाघ को वापस जंगल में खदेड़ दिया गया है। इसी के साथ वन विभाग ने बाघ के लौटने की संभावना जताई थी। यह आशंका सच साबित हुई और अगले ही दिन बाघ चलतुआ गांव से 500 मीटर की दूरी पर उल्ल नदी किनारे बैठा दिखाई दिया। इससे एक बार फिर गांव के लोग दहशत में हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व उप-निदेशक महावीर कौजलगि ने बताया कि बाघ के फिर गांव के निकट आने की सूचना मिली है। दुधवा नेशनल पार्क वार्डेन एसके अमरेश, वन कर्मियों की टीमें, दो हाथियों और जालीदार ट्रैक्टर के साथ लगातार बाघ की गतिविधियों पर नजर रखे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से सावधानी बरतने की बात कही है।
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वन विभाग गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को कर रहा जागरूक
दुधवा नेशनल पार्क उप-निदेशक महावीर कौजलगि और वार्डेन एसके अमरेश चलतुआ गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को लगातार जागरूक कर रहे हैं। चौपाल में वनाअधिकारी ग्रामीणों को बाघ से बचाव के उपाय और आबादी के निकट बाघ या उसके पगचिन्ह दिखलाई पड़ने पर इसकी सूचना वन विभाग को देने का संदेश दे रहे हैं। इस दौरान डीडी ने ग्रामीणों को बताया कि बाघ दिखने पर उसके नजदीक कतई न जाएं और न ही उसे छेड़े। खेतों में समूह बनाकर हल्ला मचाते हुए जाने के अलावा जंगल के बाहरी किनारों और खेतों में शौच के लिए न जाएं।