शासन भले ही बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चला रहा हो, लेकिन मां-बाप अपने बच्चों को बुखार आने के डर से टीका लगवाने में आनाकानी कर रहे हैं। इसका खुलासा निघासन, कुंभी और रमियाबेहड़ के गांवों में टीका लगाने पहुंची टीम के सामने हुआ है। हालांकि अधिकारियों के समझाने पर मां-बाप टीकाकरण के लिए राजी हो गए।
टीकाकरण को लेकर जारी दिशा निर्देशों की एएनएम ग्रामीणों को सही जानकारी नहीं दे रही हैं, जिससे ग्रामीण भ्रमित होकर अपने बच्चों को टीका लगवाने में हिचक रहे हैं। ऐसा मामला मंगलवार को निघासन, कुंभी और रमियाबेहड़ के कुछ गांवों में दिखाई दिया। टीम को देखकर कुछ ग्रामीणों ने अपने बच्चों को टीका लगवाने से मना कर दिया। सूचना पर पहुंचे जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह और यूनीसेफ के बदरे आलम ने गांव जाकर ग्रामीणों को समझाया और टीका लगने पर बुखार आने के भ्रम को दूर किया। तब जाकर ग्रामीण टीकाकरण के लिए तैयार हुए।
टीका लगाने के बाद बच्चों को आधा घंटा रोककर रखें
डीएमओ डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि बच्चों को टीका लगाने के बाद आधा घंटे तक रोककर रखना चाहिए, क्योंकि टीके के दुष्प्रभाव का असर आधा घंटे में दिखने लगता है। बच्चों को इससे बचाने के लिए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर एईएफआई किट (दुष्प्रभाव नियंत्रण हेतु दवाइयां) मौजूद रहती हैं, जिससे ऐसी स्थिति आने पर बच्चों का इलाज हो सके।
पेंटावेलंट से आ सकता है बुखार
डीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि गला घोंटू, काली खांसी, टिटनेस, पीलिया और निमोनिया से बचाव के लिए पेंटावेलेंट टीका लगाया जाता है। इससे बुखार आने की आशंका रहती है। बुखार आने पर पैरासीटामॉल ली जा सकती है।
एएनएम यह दें जानकारी
टीका किन बीमारियों से बचाव के लिए लगा रहा है।
इसे लगाने पर बुखार भी आ सकता है।
टीकाकरण कार्ड संभालकर कर रखें।
अगला टीका लगने की जानकारी दें।