लखीमपुर खीरी। जिला महिला अस्पताल में शनिवार को प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला की मौत हो गई। घरवालों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी मौत हुई। जबकि सीएमएस का कहना है महिला में खून की बेहद कमी थी, इसलिए उसकी मौत हो गई। हालांकि घरवालों का कहना है कि इससे पहले जब जांच के लिए लाए थे तो डॉक्टरों को खून की कमी के बारे में बताना चाहिए था।
निघासन के गांव गौरिया निवासी रामकुमार अपनी गर्भवती बहू राधा पत्नी सदाराम को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर आए थे, जिसकी शनिवार की सुबह प्रसव के दौरान मौत हो गई। रामकुमार ने बताया कि महिला अस्पताल में उसकी बहू के इलाज को लेकर लापरवाही बरती गई, इसलिए उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे, जिसकी रिपोर्ट देखकर डॉक्टरों ने दो सप्ताह बाद प्रसव होने की बात कही थी, लेकिन खून की कमी के बारे में कुछ भी नहीं बताया था। उन्होंने बताया कि प्रसव के लिए भी जब लेकर अस्पताल आए तब भी डॉक्टरों ने कुछ भी नहीं बताया। रामकुमार ने बताया कि लेबर रूम में जब प्रसव कराना शुरू कर दिया तब आकर कहा कि खून लाकर दो और जब तक हम लोग खून का इंतजाम कर पाते तब तक उसकी मौत हो गई। बताते हैं प्रसव कराने को लेकर राधा के घरवालों और डॉक्टर के बीच नोक झोक भी हुई थी।
----------------
प्रसूता की मौत छिपाते रहे डॉक्टर
प्रसव रूम में मौजूद डॉक्टर प्रसूता की मौत छिपाने में लगे रही। किसी को इसकी भनक ना लगे इसके लिए डॉक्टरों ने उसका शव प्रसव रूम के पास के वार्ड में एक बेड पर लिटा दिया और वहां पर कोई जा ना सके, इसके लिए वहां पर स्टाफ नर्सों को बैठा दिया।
..................
वर्जन
गर्भवती गंभीर एनीमिया पीड़ित थी। इस कारण प्रसव के दौरान उसकी मौत हो गई। घरवालों के आरोप गलत हैं। प्रसव को लेकर किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं हुइ है।
डॉ.मीरा वर्मा, सीएमएस