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दो बाघों ने गाय और बकरी को बनाया निवाला
ममरी। गन्ने के खेतों में विचरण कर रहे एक बाघ ने मंगलवार की शाम गांव परवस्तनगर के पास छुट्टा गाय को और दूसरे बाघ ने कठिना नदी के घमहाघाट पर बकरी को अपना निवाला बनाया। बाघ के बढ़ते हमलों से ग्रामीणों में दहशत है। एक ही दिन दो स्थानों पर बाघ के हमले होने और पशुओं के आधे खाए हुए शव, पग चिह्न मिलने की पुष्टि वन विभाग के कर्मचारियों ने भी की है। वन कर्मियों ने बताया कि एक नहीं बल्कि दो बाघ इलाके में मौजूद हैं।
सुंदरपुर के बीडीसी राम कुमार वर्मा, प्रधान रामबिलास चौधरी, घमहाघाट के सरदार लाल सिंह, इंद्रजीत सिंह, बख्शीश सिंह, कश्मीर सिंह आदि ने बताया कि मंगलवार की शाम करीब पांच बजे सुंदरपुर निवासी श्रीकृष्ण गौतम वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर के देवीपुर बीट के जंगल से सटे बाबा बालक दास स्थान पर बकरियां चरा रहा था। इसी बीच गन्ने के खेत में मौजूद बाघ ने बकरी पर हमला कर उसे खेत में खींच ले गया और अपना निवाला बना लिया। वहां मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया और आग जलाया तो बाघ बकरी का आधा खाया शव छोड़कर जंगल की ओर चला गया।
बताया जा रहा है कि ग्रामीण अपने घरों को भी नहीं पहुंच पाए थे कि गांव परवस्तनगर के पास जंगल से 500 मीटर की दूरी पर रामनरेश यादव, झबलूलाल यादव के गन्ने के खेत में विचरण कर रहे दूसरे बाघ ने घास चर रही गाय पर हमला कर उसे जंगल में खींच ले गया। सूचना पर पहुंचे फारेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक राजेश कुमार, बेचेलाल पहुंचे और बताया कि ने दोनों स्थानों पर पशुओं के आधे खाए शव मिले हैं। बाघ के पगचिह्न भी पाए गए हैं। इससे पूर्व बाघ पहली जून से लेकर अब तक दो ग्रामीणों और नौ अन्य पशुओं पर हमला कर चुका है जिससे वहां दहशत का माहौल है। इससे पूर्व बाघ तीन बार सरदार लाल सिंह के झाले में घुस चुका है। फारेस्टर राम प्रसाद का कहना है कि घमहाघाट और परवस्तनगर के बीच की दूरी लगभग तीन किलोमीटर है ऐसे में एक घंटे के भीतर दो पशुओं पर हमले होने से स्पष्ट होता है कि वहां पर एक नहीं बल्कि दो बाघ मौजूद हैं। बताया कि एक बाघ घमहाघाट पर तो दूसरा भाग सुंदरपुर एरिया में ठिकाना बनाए हुए है। वैसे तो वहां के जंगल में पांच बाघ मौजूद हैं। रेंजर बनारसी दास ने बताया कि गांव वालों को इस बाबत हिदायत दी जा चुकी हैं कि जंगल से सटे खेतों में पशु चराने न जाएं, फिर भी लोग अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने गांव वालों से सतर्क रहने, खेतों में समूह बनाकर जाने की सलाह दी है।
बाघ के हमलों से ग्रामीणों में दहशत
ममरी। घमहाघाट, सुंदरपुर, परवस्तनगर क्षेत्र में तीन महीने से दहशत का पर्याय बने बाघ ने पहली जून को दूलीपुर के युवक गजराज को घायल कर, 17 जून को एक बछड़े, 18 जून को सुंदरपुर के किसान बालकराम को हमला कर मार डाला था। इसके अलावा बाघ दो बछड़े, एक गाय, एक सियार, एक बकरी सहित नौ अन्य पशुओं को अपना निवाला बना चुका है। क्षेत्र वासियों का कहना है कि इस बाबत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ टीम के वैज्ञानिक भी दो बार सुंदरपुर गांव पहुंच चुके हैं, फिर भी बाघ को ट्रंकुलाइज करने के लिए कोई भी ठोस कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। बल्कि विभागीय अधिकारी कोरे आश्वासन देते रहे हैं जिसका खामियाजा क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है।