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अपने वतन लौटे प्रवासी परिंदें

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घर लौटे प्रवासी परिंदे,
सूनी हुई नगरिया झील
सूनासूना नजर आने लगा कुकरगढ़ा जलाशय भी
- प्रवासी पक्षियों को विदा करने के लिए जमा हो रहे पक्षी विशेषज्ञ और स्थानीय लोग
अनिल मिश्र
बांकेगंज।
ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर लंबी उड़ान भरकर दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन मैलानी रेंज की महुरेना बीट स्थित नगरिया झील और किशनपुर सेंक्चुरी मैलानी रेंज के मड़हा परिक्षेत्र के कुकरगढ़ा जलाशय में शीतकालीन प्रवास पर आए प्रवासी पक्षी अब अपने वतन लौटने लगे हैं। पिछले कई दिनों से सैकड़ों पक्षियों के झुंड यहां से उड़ान भर रहे हैं। झील और जलाशय में कुछ पक्षी अभी शेष हैं। होली के बाद तक यह झीलें प्रवासी परिंदों से खाली हो जाएंगी।
तीन माह तक प्रवासी परिंदों के साथ घुल मिलकर रहने वाले स्थानीय पक्षी इन दिनों उदास-उदास नजर आ रहे हैं। क्षेत्र के पक्षी प्रेमी और पक्षी विशेषज्ञ इन दिनों प्रवासी पक्षियों को विदा करने के लिए सुबह शाम झील और जलाशय पर जमा हो रहे है। दिसंबर से लेकर फरवरी तक नगरिया झील और कुकरागढ़ा जलाशय प्रवासी परिंदो की चहचहाहट से गूंजते रहे। इस बार इन परिंदों को हाल ही में दुधवा नेशनल पार्क में आयोजित इंटर नेशनल बर्ड फेस्टिवल का हिस्सा बनने का मौका भी मिला। पक्षी विशेषज्ञों और स्कूली बच्चों ने सर्दी के मौसम में कई बार यहां आकर रंग-बिरंगे पक्षियों का दीदार किया और उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया।
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उत्तर एशिया और यूरोप के ठंडे देशों में सर्दियों के मौसम में झीलों का पानी जम जाता है, उस समय वहां परिंदों के लिए आवास और भोजन की समस्या पैदा हो जाती है। तब वहां से लाखों की संख्या में परिंदे हजारों किलोमीटर लंबी दूरी तय कर तराई की झीलों और जलाशयों में आ जाते हैं।
खीरी जिले की सेमरई, नगरिया, किशनपुर सेंक्चुरी का झादीताल, दुधवा का भादीताल, शारदा नदी और रमियाबेहड़ की मैनहन आदि झीलों में यह प्रवासी परिंदे आकर चार महीने के लिए बसेरा करते हैं। यहां उन्हें अनुकूल प्राकृतिक आवास, सुरक्षा और पर्याप्त भोजन मिलता है। फरवरी के अंत में जब सर्दी खत्म हो जाती है तो अपने देश लौट जाते हैं।

इन-इन देशों से आते
हैं प्रवासी परिंदे..
नगरिया झील और कुकरगढ़ा जलाशय में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, चीन, तिब्बत और लद्दाख, दक्षिण साइबेरिया, उत्तर साइबेरिया से खूबसूरत पक्षी आते हैं।

यहां ये आते हैं प्रवासी परिंदे
स्पॉट विल्ड डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रेलेग गूस, बार हेडड गूस, टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, ब्राहमानी डक, कूट मून हेन, अबलक, कुर्चिया बत्तख समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में हर साल आते हैं।
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खीरी जिले के वेटलैंड में हर साल सर्दियों मेें बड़ी संख्या में ठंडे देशों से प्रवासी परिंदे आते हैं और चार महीने का प्रवास करने के बाद लौट जाते हैं। हर साल की तरह इस साल भी इन प्रवासी परिंदों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए थे। स्कूली बच्चों को भी बर्ड वॉचिंग विभाग से कराई गई, ताकि बच्चे पक्षियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकें और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक हो सके।
- डॉ अनिल पटेल, उप निदेशक, बफरजोन, दुधवा टाइगर रिजर्व
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