जर्मन खसरा को लेकर स्वास्थ्य महकमा चौकन्ना
करीब 13 लाख बच्चों का होगा टीकाकरण
26 नवंबर से शुरू होगा अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। मिजिल्स रूबेला (जर्मन खसरा) खतरनाक बीमारी है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आते हैं। यह बच्चों को दीमागी रूप से कमजोर भी कर देता है। बच्चों का इससे बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। इससे बचाव के लिए जल्द ही टीकाकरण अभियान शुरू होगा।
सीएमओ डॉ.मनोज अग्रवाल ने बताया कि मीजेल्स रूबेला (जर्मन खसरा) हवा में तेजी से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छीकने से दूसरा व्यक्ति आसानी से संक्रमित हो जाता है। उन्होंने बताया कि इसकी चपेट में आने वाले को हल्का बुखार और दाने हो जाते हैं। वहीं गर्भवती महिला के संक्रमित होने से उसका गर्भस्थ शिशु भी अपंग हो सकता है, जिसे कांजेनाइटल रूबेला सिंड्रोम कहते हैं। प्रभावित बच्चों में कान, आंख संबंधी विकृतियां हो जाती हैं या फिर बच्चा दिमागी तौर पर कमजोर हो जाता है। कई बच्चे मधुमेह के भी शिकार बन सकते हैं। सीएमओ ने बताया कि इस बीमारी की चपेट में वह लोग ज्यादा आते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसलिए लोगों को चाहिए अपना खान पान व्यवस्थित रखें, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावी रहे। सीएमओ ने बताया कि नौ माह से 15 साल तक के करीब 13 लाख बच्चों को मिजिल्स रूबेला से बचाने के लिए 26 नवंबर से टीकाकरण शुरू होगा।
खतरानक है रूबेला
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2005 में देशभर में कांजेनाइटल रूबेला सिंड्रोम से सिर्फ 238 बच्चे पीड़ित थे, लेकिन 2014 तक इनकी संख्या बढ़कर 4146 हो गई। प्रभावितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विभाग ने टीकाकरण कराने का फैसला लिया है। सीएमओ ने बताया कि हर साल 38 हजार से अधिक बच्चे इसकी चपेट में आने से मौत का शिकार हो जाते हैं।