थम नहीं रहा बुखार, पांच और बच्चों की मौत
बाढ़ प्रभावित गांवों में संक्रामक रोगों का कहर
गांवों में फैली गंदगी के कारण बढ़ रहा बुखार और डायरिया का प्रकोप
अमर उजाला ब्यूरो
21 एलकेएच 4
लखीमपुर खीरी। बाढ़ प्रभावित गांवों में संक्रामक रोगों ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बच्चों से लेकर बड़े- बुजुर्ग तक इसका दंश झेल रहे हैं। कुछ का सीएचसी, पीएचसी पर तो कुछ का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। संक्रामक रोगों की चपेट में आकर हाल ही के दिनों में चार बच्चों की मौत भी हो चुकी है। बुखार, डायरिया और हैजा केे प्रकोप से गांवों में हाहाकार मचा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं।
संक्रामक रोगों के प्रकोप का आलम यह है कि रोजाना बुखार और डायरिया पीड़ित बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। इधर दो दिन में बुखार और डायरिया पीड़ित सात बच्चे भर्ती हुए। इसमें गोला के भुसौरिया निवासी बबलू सिंह ने बुखार आने पर 35 दिन के पुत्र हर्ष, ईसानगर के खमरिया निवासी गुड्डू ने 12 वर्षीय पुत्र समीर अहमद, लहरपुर निवासी गिरधर ने छह वर्षीय पुत्री शालू देवी, मोहम्मदी निवासी विनोद कुमार ने सात वर्षीय पुत्री सुंदरी, पकरिया निवासी विजय ने डेढ़ वर्षीय पुत्र आशीष को बुखार आने एंव भंसडिया स्थित काशीराम कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने दो वर्षीय पुत्र प्रिंस एवं सिंगाही के सिंगहा खुर्द निवासी तुलसीराम ने 14 वर्षीय पुत्री शुभी को डायरिया होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज शुरू कराया है।
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सीएचसी अधीक्षक ने माना बुखार से हुईं बच्चे की मौत
ईसानगर। ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में संक्रामक रोगों का कहर जारी है। बृहस्पतिवार को साइनपुरवा मजरा अचरौरा निवासी अफसर अली के तीन वर्षीय पुत्र सज्जाद की मौत हो गई। सज्जाद की मौत से सीएचसी प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाकर बुखार, डायरिया पीड़ित बीस पच्चीस लोगों का परीक्षण कर दवाएं दी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. वीके स्नेही का कहना है कि सज्जाद की मौत खसरे से नहीं बुखार से हुई है। वह दो दिन से पीड़ित था और उसके घरवाले अप्रशिक्षित डॉक्टर के पास उसका इलाज करा रहे थे। उचित उपचार न मिलने के कारण उसकी मौत हुई है। उन्होंने बताया कि गांव में कई लोग बुखार से पीड़ित हैं, जिन्हें दवाएं देकर बीमारियों से बचने के लिए जागरूक किया गया।
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डायरिया से हुई छह वर्षीय बच्ची की मौत
हैरमखेड़ा। जमुनिया रना गांव में भी बुखार और डायरिया प्रकोप है। गांव निवासी सुशील कुमार की छह वर्षीय पुत्री प्रीति देवी की डायरिया से मौत हो गई। वहीं गांव के ही शिव सिंह का पूरा परिवार बुखार और डायरिया की चपेट में है। गांव के ही लाखन पुत्र शिव प्रसाद एवं उनकी एक वर्षीय पुत्री यामिनी और छह वर्षीय पुत्र अंकिल, सरोज की पांच वर्षीय पुत्री जूली एवं चार वर्षीय पुत्र रवि सहित सोबरन का परिवार भी डायरिया से पीड़ित है। प्रधान लाला राम का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते पूरा गांव बीमारी की चपेट में है।
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सुभानपुर गांव में बुखार पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे की मौत
बांकेगंज। सीएचसी क्षेत्र के गांवों में बुखार का कहर जारी है। बुखार भी अब जानलेवा साबित होने लगा है, जिससे क्षेत्र में हाहाकार मचा है। शुक्रवार की सुबह सुभानपुर गांव में बुखार पीड़ित एक तीन वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। जबकि कई बच्चे पीड़ित हैं, जिनके घरवाले भयभीत हैं। वहीं सीएचसी प्रशासन जानकारी होने के बावजूद गांवों में कैंप लगाने को लेकर संजीदा नहीं है। सीएचसी बांकेगंज से तीन किलोमीटर दूर स्थित सुभानपुर गांव निवासी बाबूराम के तीन वर्षीय पुत्र अमरीक सिंह को दो दिन से बुखार आ रहा था। जिसे सीएचसी लेकर बांकेगंज सीएचसी पहुंचा, इससे पहले उसकी मौत हो गई। बाबूराम ने बताया कि बड़ी बेटी अंशुका भी बुखार से पीड़ित है। उनका कहना है कि गांव में और भी बच्चे बुखार से पीड़ित हैं, लेकिन सीएचसी के डॉक्टरों ने गांव आना तक जरूरी नहीं समझा।
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बुखार से पकरिया गांव में दो बच्चों की मौत
संसारपुर। सीएचसी बांकेगंज के गांव पकरिया निवासी राजकुमार के पांच वर्षीय पुत्र रंजीत कुमार और कामता प्रसाद के चार वर्षीय पुत्र मोहित को कई दिन से बुखार आ रहा था, जिनकी शुक्रवार को मौत हो गई। वहीं गांव में रोली, संध्या देवी, डॉली, विजय कुमार, राधा कुमारी, अर्चना देवी, सोनी देवी सहित कई और बच्चे बुखार की चपेट में हैं। गांव के ही अरविंद कुमार, अनिल कुमार, राजेंद्र प्रसाद, संतोष वर्मा, वेदप्रकाश का कहना है कि गांव में भीषण गंदगी फैली है जिस कारण मच्छरों का अंबार है, लेकिन अभी तक न तो स्वास्थ्य विभाग ने ही गांव में छिड़काव कराने की जरूरत समझ़ी है और न ही प्रधान ने साफ सफाई कराने की ही।
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वर्जन.......
अलग-अलग इलाकों में पांच बच्चों की बुखार से मौत की जानकारी पत्रकारों से हुई है। सभी गांवों में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाएगी। लोगों का परीक्षण कराया जाएगा और दवाएं भी दी जाएंगी। इन मौतों की बाबत अधिकृत जानकारी रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता लग पाएगी।
डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ