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बलि ले रही बाढ़, नहीं चेत रहा प्रशासन
पंद्रह दिन में चार शव हो चुके हैं बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
महेवागंज/सुंदरवल। फूलबेहड़ और इससे सटे इलाकों में शारदा नदी तबाही मचाए है। बंधे के अंदर करीब 40 गांव बाढ़ के पानी से तरबतर हैं। जबकि मंझरी, अहिराना और सिंधिया में कटान से लोग बेेेघर हो रहे हैं। बाढ़ पीड़ित रोजमर्रा के सामान और इलाज के चक्कर में तैरकर या नाव के सहारे तटबंध पार करने को बिवश हैं। इसी जद्दोजहद में कभी कभार उनकी जान पर भी बन रही है। चौबीस घंटे के अंतराल में तीन नाव हादसों में दो लोगों की मौत ने इसकी तस्दीक भी कर दी है। आंकड़ों पर गौर करें तो फूलबेहड़ पुलिस पंद्रह दिन में बाढ़ में डूबे एक महिला समेत चार लोगों के शव बरामद कर चुकी है।
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मुहं चिढ़ा रहा सहायता केंद्र
बाढ़ पीड़ितों के लिए मीलपुरवा में बनाया गया राहत केंद्र अब तक खुला ही नहीं है। पीड़ितों को मदद सिर्फ कागजी मिल रही है। बंधे के अंदर 40 गांवों की करीब पचास हजार से भी ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। मकानों की छत और तटबंध इनका अस्थाई डेरा बना है। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि बंधे पर ही मौजूद कुछ लोगों को राहत सामग्री बांट दी जाती है। जबकि बाढ़ से घिरे असल लोगों तक सामग्री नहीं पा पा रही है।
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नहीं नजर आती रेस्क्यू टीम
करीब चार दर्जन गांव बाढ़ से घिरे हैं। गांवों के लोगों को बाहर आने जाने के लिए प्रशासन ने 19 नावों का इंतजाम किया है। ग्रामीणों की मानें तो प्रभावित लोगों की अपेक्षा नावों की तादाद काफी कम है। इसी कमी के चलते कभी कभार क्षमता से अधिक लोग नाव पर सवार हो जाते हैं। जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। पीड़ित सद्दू, सोबरन, वसीउल्ला ने बताया कि बीते वर्षों में मानसून से पहले ही मिलपुरवा बंधे पर फ्लड टीम डेरा डाल लेती थी। कहा इस बार ऐसा कोई इंतजाम नहीं है। ग्रामीणों ने जौहरा, भुरकुंडा और नरहर में हुए नाव हादसों के बाद भी मिलपुरवा बंधे पर कोई रेस्क्यू टीम तैनात न किए जाने पर रोष जताया।