दुधवा टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन को मिला आकार
गवर्निंग और एक्जीक्यूटिव कमेटियों के गठन का काम पूरा
मनोनीत होने वाले सदस्यों के लिए एफडी डीटीआर ने भेजे प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के पांच माह बाद दुधवा टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन को अपना आकार मिल गया है। फाउंडेशन का पंजीकरण हो चुका और बैंक में इसका खाता भी खुल गया है। फाउंडेशन की गवर्निंग कमेटी और एक्जीक्यूटिव कमेटियों के गठन का काम पूरा कर लिया गया है। गवर्निंग कमेटी में अभी तीन सदस्यों को नामित किया जाना बाकी है, इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व से नामों का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। केवल शासन की मुहर लगना बाकी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि 10 अप्रैल की कैबिनेट बैठक में दुधवा टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन के गठन की मंजूरी मिलने के बाद 19 जुलाई को फाउंडेशन का पंजीकरण करा लिया गया है। फाउंडेशन का बैंक खाता खुलवा कर पर्याप्त धन इसमें जमा किया गया है। जल्दी ही फाउंडेशन की एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक होने वाली बैठक के बाद फाउंडेशन काम शुरू कर देगा।
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यह है टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन का स्वरूप
दुधवा टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन में दो कमेटियों का गठन किया गया है। इसमें प्रदेश स्तर पर वनमंत्री की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय गवर्निंग कमेटी गठित की गई है। प्रमख सचिव वन कमेटी के उपाध्यक्ष और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सदस्य सचिव हैं। सदस्यों में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विभागाध्यक्ष), दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, पर्यटन महानिदेशक, डीएम खीरी और बहराइच के अलावा खीरी और बहराइच के एक-एक विधायक और एक वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हैं। जबकि दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की अध्यक्षता में एक एक्जीक्यूटिव कमेटी गठित हुई है जिसमें दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक सदस्य सचिव हैं, कर्तनिया घाट वन्यजीव विहार के उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक के अलावा टाइगर रिजर्व स्टाफ के दो कर्मी भी सदस्य के रूप में शामिल हैं।
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दुधवा टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन से होंगे यह फायदे
-दुधवा टाइगर रिजर्व में ईकोटूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
-दुधवा के आसपास थारू आदिवासियों को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
-दुधवा के ग्रास लैंड, वेटलैंड आदि का विकास होगा।
-दुधवा के पर्यटकों का प्रवेश शुल्क फाउंडेशन की आय में शामिल होगा।
-राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और एनजीओ से भी आर्थिक सहयोग लिया जा सकेगा।
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दुधवा टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन के गठन से बाघों के संरक्षण को नए आयाम मिलेंगे। बाघों के प्राकृतिक आवास को विकसित किया जाएगा। ईकोटूरिज्म के विकास में भी यह फाउंडेशन अहम भूमिका निभाएगा।
-रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व