अब ई-बर्ड से दुधवा के जंगल की होगी निगरानी
भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से चलेगा प्रोजेक्ट
ड्रोन कैमरे के जरिए रहेगी वन और वन्यजीवों पर नजर
अशोक निगम
लखीमपुर खीरी। अब दुधवा टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों की निगरानी ई-बर्ड से होगी। इसके लिए पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। ग्लोबल टाइगर डे के मौके पर इस प्रोजेक्ट का सफलता पूर्वक ट्रायल भी किया गया है। यह प्रोजेक्ट भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के सहयोग से चलाया जाएगा। इसके लिए ड्रोन कैमरे भारतीय वन्यजीव संस्थान उपलब्ध कराएगा और वनकर्मियों को इसके संचालन की विधिवत ट्रेनिंग भी देगा। इससे दुधवा के वन्यजीवों की मॉनिटरिंग अच्छे ढंग से हो सकेगी और वनापराधियों और उनकी गतिविधियों पर नजर भी रखी जा सकेगी।
आम तौर से बाघों के जंगल से बाहर आने पर उनकी लोकेशन जानने के लिए ही ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल होता था। ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल पहले भी हुआ है लेकिन विशेष परिस्थितियों में। अब ड्रोन कैमरे जंगल और वन्यजीवों की निगरानी के लिए स्थाई रूप से लगाए जाएंगे। यह परियोजना भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से दुधवा टाइगर रिजर्व में शुरू की जा रही है। इसके लिए संस्थान डीटीआर को दो तरह के कॉप्टर ड्रोन और प्लेन मॉडल ड्रोन कैमरे उपलब्ध कराएगा। साथ ही वनकर्मियों को इसके इस्तेमाल और इससे मॉनिटरिंग का प्रशिक्षण भी देगा।
गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में हुआ प्रोजेक्ट का ट्रायल
ग्लोबल टाइगर डे पर दुधवा टाइगर रिजर्व में हुई लांग रूट पेट्रोलिंग के दौरान गैंडा पुनर्वास योजना में इसका ट्रायल किया गया। ट्रायल के दौरान 30 मिनट के अंदर ड्रोन कैमरे से नौ गैंडे लोकेट किए गए जिसमें एक बच्चे के साथ मादा गैंडा भी दिखी। इस ट्रायल के दौरान अपर प्रधान मुख्य संरक्षक एसपी यादव, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय, दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि भी मौजूद रहे। आम तौर से बरसात के मौसम में गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में गैंडों की मॉनिटरिंग मुश्किल होती है। अब ड्रोन कैमरों के जरिए उन पर नजर रखी जा सकेगी।
इन दिनों किशनपुर सेंक्चुरी में चल रहा है ट्रायल
भारतीय वन्यजीव संस्थान इन दिनों किशनपुर सेंक्चुरी में ई-बर्ड प्रोजेक्ट का ट्रायल कर रहा है। ट्रायल के तहत किशनपुर सेंक्चुरी के भादी ताल पर ड्रोन कैमरे उड़ाए जा रहे हैं। भादी ताल के आसपास बारासिंगों की पर्याप्त संख्या है। इसके चलते इस इलाके में बाघों की संख्या भी अधिक है। ड्रोन कैमरों के जरिए बाघों पर नजर रखी जा रही है। वन्यजीव संस्थान के अधिकारी ट्रायल के बाद अपनी रिपोर्ट संस्थान को सौंपेंगे इसके बाद फील्ड डायरेक्टर से परामर्श के बाद ई-बर्ड प्रोजेक्ट का स्थाई रूप से दुधवा टाइगर रिजर्व में शुरू कर दिया जाएगा।
ई बर्ड प्रोजेक्ट के तहत यहां होगी निगरानी
ई बर्ड प्रोजेक्ट के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व में शामिल दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर सेंक्चुरी, कर्तनियाघाट के अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के वन्यजीव बाहुल्य और वनापराध के लिए संवेदनशील जंगलों की निगरानी ड्रोन कैमरों के जरिए होगी। बाघों के जंगल से बाहर निकलने पर बाघ, तेंदुआ, हाथी आदि वन्यजीवों की निगरानी आसान हो जाएगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों की निगरानी के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के सहयोग से ई-बर्ड प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसका ट्रायल हो रहा है। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। जल्दी ही इसे दुधवा टाइगर रिजर्व में स्थाई रूप से शुरू किया जाएगा।
- रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व