नगरीय निकाय में अध्यक्ष पद के आरक्षण ने कई प्रमुख दावेदारों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। विशेषकर नगर पालिका लखीमपुर में अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने से अध्यक्ष पद की दावेदारी ठोकने वाले पूर्व पालिका अध्यक्ष समेत कई दिग्गजों को तगड़ा झटका लगा है। चुनावी गणित के गड़बड़ाने से अब कोई अपनी पत्नी तो कोई अपनी बहू को मैदान में उतारने की रणनीति बना रहा है।
जिले में कुल चार नगर पालिकाएं और छह नगर पंचायतें हैं। नई आरक्षण व्यवस्था में लखीमपुर नगर पालिका महिला के लिए आरक्षित हुई है। यह सीट इससे पहले तीन बार से सामान्य चली आ रही है। पिछले चुनाव में सामान्य सीट पर चुनाव लड़कर डॉ. इरा श्रीवास्तव चुनाव जीती थीं। इससे पहले दो बार ज्ञान प्रकाश बाजपेयी अध्यक्ष रहे। 1997 के बाद इस बार फिर यह सीट महिला के लिए आरक्षित हुई है। पिछले चुनाव में सीट सामान्य होने के बाद भी पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा चुनाव मैदान में थीं। इस बार भी सीट सामान्य रहने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन आरक्षण ने कई प्रमुख उम्मीदवारों की गणित को गड़बड़ा दिया है।
जिले की तीन अन्य नगर पालिकाएं गोला, मोहम्मदी और पलिया अनारक्षित रह गई हैं। पिछले चुनाव में पलिया नगर पालिका को छोड़कर सभी पालिकाओं पर महिलाओं का कब्जा रहा था। गोला से मीनाक्षी अग्रवाल और मोहम्मदी से दुर्गा मेहरोत्रा चुनाव जीती थीं, जबकि पलिया सामान्य सीट से केबी गुप्ता चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने थे। इस बार अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की संख्या पिछले चुनाव की अपेक्षा ज्यादा बढ़ सकती है।
नगर पंचायतों के आरक्षण में सबसे ज्यादा फेरबदल हुआ है। मैलानी नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अनुसूचित जाति, खीरी पिछड़ा वर्ग महिला और धौरहरा सीट महिला के लिए आरक्षित हुई है। पिछले चुनाव में मैलानी से अनिता यादव, खीरी टाउन से फहीम अहमद और धौरहरा से राजीव जायसवाल चुनाव जीते थे। इस बार आरक्षण ने इन तीनों की वापसी का रास्ता बंद कर दिया है। यह तीनों अध्यक्ष समाजवादी पार्टी के थे। ओयल सिंगाही और बरबर नगर पंचायत अध्यक्ष की सीटें अनारक्षित हैं।
जहां तक नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए टिकट की दावेदारी का सवाल है। भारतीय जनता पार्टी के टिकट के दावेदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी टिकट की मांग है। टिकट के लिए आरक्षण घोषित होने के पहले ही दावदारों ने अपनी गोटें बिछाना शुरू कर दी थीं। आरक्षण घोषित होने के बाद राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं।