लखीमपुर खीरी। सरकारी दुकानों पर बंटने वाला निशुल्क राशन सिर्फ गरीबों के लिए है। लेकिन, हजारों ऐसे अमीर हैं, जो विभागीय कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की साठगांठ से मुफ्त राशन डकार रहे हैं। धोखाधड़ी कर मुफ्त राशन लेने वाले कार्डधारकों की सूची शासन ने लखीमपुर पूर्ति विभाग को भेजी है। अब सत्यापन के बाद ऐसे कार्डधारकों पर कार्रवाई की जाएगी, जो अमीर होते हुए भी गरीबों का हक मार रहे हैं।
आयकर विभाग से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, लखीमपुर के 5024 आयकर दाता हैं। जिनके राशन कार्ड बने हैं और वह प्रत्येक माह राशन ले रहे हैं। जनपद में 8,25,640 कार्डधारक और 3,10,7631 यूनिट हैं, जिनको प्रत्येक माह राशन दिया जाता है। इसमें पात्र गृहस्थी के 7,15,750 और अंत्योदय के 1,09,890 उपभोक्ता है। अंत्योदय को प्रत्येक माह 35 किलो और पात्र गृहस्थी कार्डधारक को प्रत्येक यूनिट पांच किलो मुफ्त राशन दिया जाता है।
इसमें गेहूं और चावल का वितरण होता है। गरीबों के बीच बड़ी संख्या में अपात्र लोग विभाग को गुमराह कर सरकारी राशन हड़प रहे है। 5024 आयकरदाता के अलावा कई ऐसे लोग भी हैं, जिनकी कृषि जमीन मानक से कहीं अधिक है। कुछ अन्य मानकों से इतर हैं। ऐसे सभी उपभोक्ताओं का सत्यापन के बाद तत्काल प्रभाव से कार्ड निरस्त किए जाएंगे।
राशन कार्ड बनवाने के लिए भटकते हैं लोग
जनपद में कई ऐसे पात्र हैं, जनका आज तक राशनकार्ड नहीं बना है। ऐसे में उनको सरकार की मुफ्त योजना नसीब नहीं हो पाती है। वह राशन कार्ड बनाने के लिए आवेदन के बाद लगातार विभाग में संपर्क करते है। विभाग लक्ष्य पूरा होने का हवाला देकर उनको लौटा देता है। बीच-बीच में अपात्रों के राशन कार्ड कटने के बाद पात्रों के कार्ड बनाए भी जाते हैं।
कैसे बने अपात्रों के कार्ड
राशनकार्ड बनवाने के लिए आय सीमा निर्धारित है। शहरी की तीन लाख और ग्रामीण की वार्षिक आय दो लाख होनी चाहिए। राशनकार्ड बनवाने के लिए तहसील से जारी आय प्रमाणपत्र लगता है। इतनी प्रक्रिया होने के बाद भी आखिरकार अपात्रों के राशनकार्ड कैसे बन जाते हैं।
शासन से उनकी सूची मिली है, जो आयकरदाता होते हुए भी राशन लेते हैं। सभी का सत्यापन कराया जाएगा। संबंधितों के राशन कार्ड निरस्त किए जांएगे। साथ ही रिकवरी की जाएगी। आयकरदाता के अलावा भी कई अन्य श्रेणी के अपात्र लोगों के नाम भी सामने आए हैं।
-अंजनी कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी