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Lakhimpur Kheri News: ई-केवाईसी न करने वालीं 47 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सेवा समाप्ति का नोटिस

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लाभार्थीं का चेहराप्रमाणी करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। स्रोत विभाग
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लखीमपुर खीरी। ई-केवाईसी को लेकर विभाग काफी प्रयास कर रहा है। जून की समीक्षा में 700 से अधिक कार्यकर्ताओं की लापरवाही सामने आई थी। विभाग ने सभी को नोटिस जारी करते हुए मानदेय रोक दिया था। विभाग की इस कार्रवाई से कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया। आनन-फानन अधिकांश कार्यकर्ताओं ने काम शुरू कर दिया, लेकिन 47 कार्यकर्ताओं ने अब तक काम शुरू नहीं किया।
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विभाग ने ऐसे लोगों को चिन्हित करते हुए सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया है। इसमें बेहजह ब्लॉक की चार, निघासन की 16, रमियाबेहड़ की दो, लखीमपुर की आठ, नकहा छह, मितौली छह, पसगवां चार और ईसानगर की एक कार्यकर्ता की सेवा समाप्ति के लिए नोटिस जारी किया गया।



लाभार्थी खुद भी कर सकते हैं ई-केवाईसी
ई-केवाईसी के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जा रहीं हैं। वहीं लाभार्थी स्वयं भी ई-केवाईसी कर सकता है। इसके लिए अपने मोबाइल में पोषण ट्रेकर एप को अपलोड करना होगा। सेल्फ ई-केवाईसी के विकल्प पर जाकर ई-केवाईसी करा सकते हैं।
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अब ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण वाले लाभार्थियों को ही पुष्टाहार दिया जाएगा। अब तक एक भी ई-केवाईसी न करने वालीं 47 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है। किसी भी दशा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ई-केवाईसी न होने से लाभार्थियों को मातृ वंदन सहित कई योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है। लाभार्थी भी ई-केवाईसी के लिए आगे आएं। -भारत प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी



नेटवर्क की दिक्कत तो कहीं आधार लिंक नहीं, कैसे करें ई-केवाईसी
- ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण वाले लाभार्थियों को ही मिलेगा पुष्टाहार
- अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आगे आ रही परेशानी, नहीं बढ़ पा रहा आंकड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत शत-प्रतिशत लाभार्थियों की ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण किया जाना है, जिसकी अंतिम तिथि 15 जुलाई है। मात्र एक सप्ताह बचा है, लेकिन काम 35 प्रतिशत से अधिक शेष है। ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण में शासन से लेकर जिलास्तर पर सख्ती बरती जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी लगी हैं, लेकिन उनके आगे तमाम प्रकार की समस्याएं आ रहीं हैं।
चार साल पुराने सरकारी मोबाइल पर पोषण ट्रेकर एप काम नहीं कर रहा। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने निजी मोबाइलों का इस्तेमाल कर रहीं हैं। अधिकांश केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जहां नेटवर्क की समस्या रहती है। नेटवर्क ठीक से न चलने पर ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण नहीं हो पाता। लाभार्थी तो परेशान होते ही हैं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दूसरी बड़ी समस्या काफी लाभार्थियों का मोबाइल नंबर आधार से लिंक न होना है। इसकी वजह से भी ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण नहीं हो पा रहा।
तीसरी बड़ी समस्या यह कि काफी लाभार्थी कमाने-खाने के लिए घर से बाहर हैं, ऐसे में उनकी भी ई-केवाईसी नहीं हो पा रही है। कार्यकर्ता करें तो क्या करें। इधर, विभाग शत-प्रतिशत ई-केवाईसी पर जोर दे रहा है, लेकिन समस्याओं के आगे आंकड़ा नहीं बढ़ पा रहा। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 2.59 लाख लाभार्थी हैं। इसमें सोमवार तक 1.68 लाख यानी 65 प्रतिशत लाभार्थियों की ही ई-केवाईसी हो सकी है। अभी 35 प्रतिशत ई-केवाईसी होनी है, जबकि समय मात्र एक सप्ताह शेष है।
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