जंगल से दूध कारोबार की आड़ में हो रहा शिकार
लखीमपुर खीरी। जंगल में चल रही अवैध गौढ़ियां (डेयरी) शिकारियों का अड्डा बन गई हैं। संपूर्णानगर रेंज में बहुत से लोग वनभूमि पर अवैध कब्जा कर गौढ़ियां चला रहे हैं। इन गौढ़ियों की आड़ में वन्यजीवों का शिकार भी रहा है। अब वन विभाग ने इन गौढ़ियों को हटाने का अभियान शुरू किया तो गौढ़ियां चलाने वाले लोग उग्र विरोध पर उतर आए हैं। पिछले सप्ताह हटाई गई गौढ़ियों की जगह पर अवैध कब्जेदारों ने फिर छप्पर आदि डालकर खुद आग लगा दी और आरोप वन विभाग पर मढ़ दिया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि नेपाल के शुक्लाफाटा से पीलीभीत, टाटरगंज, हजारा, संपूर्णानगर और कंबोजनगर तक बाघ, तेंदुआ, जंगली सुअर और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक कॉरीडोर है। करीब 30 हजार हेक्टेयर के इस हिस्से में घना जंगल न होकर बड़े-बड़े घास के मैदान हैं। इन घास के मैदानों पर अवैध रूप से कब्जा कर लोगों ने जानवर चराने के लिए गौढ़ियां बना लीं। झोपड़ियां डालकर वहीं से दूध और खाद का कारोबार कर रहे हैं। संपूर्णानगर इलाके में ऐसी दर्जनों गौढ़ियां चल रही हैं। यह गौढ़ियां कुछ पुराने और कुछ रिटायर्ड वनकर्मियों की मिली भगत से चल रही हैं। जांच में इस बात का खुलासा भी हुआ है। उन कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है।
वर्ष 1985 में इन गौढ़ियों में इजाफा हुआ है। यह गौढ़ियां (डेयरी) जंगली जानवरों का शिकार और वन्यजीव अंगों के कारोबार करने के लिए कुख्यात बाबरिया गिरोह का मुख्य अड्डा हुआ करते थे। अगस्त 2005 में बाबरिया गिरोह की सरगना दलीपो को संपूर्णानगर रेंज के इसी इलाके से गिरफ्तार किया गया था। इसके नौ महीने बाद कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार दरिया सिंह बाबरिया, राजू पुरबिया समेत बावरिया गिरोह के आठ शिकारी गिरफ्तार किए गए। इन्होंने पूछताछ में विहार के वाल्मीकि नेशनल पार्क तक से शिकार करने की बात स्वीकार की थी। 2008 में कर्तनियाघाट से ही नत्थू बावरिया पकड़ा गया। 2010 में टाटरगंज इलाके से दलीपो को पकड़ा गया। यह इलाका गौढ़ियों की आड़ में वन्यजीवों का शिकार करने के लिए जाना जाता है।
संपूर्णानगर रेंज का नरौसा गांव बावरिया गिरोह का मुख्य अड्डा माना जाता है। इस गांव के पास वनभूमि पर कई गौढ़ियां संचालित हो रही है। बताते हैं गौढ़ियां संचालित करने वाले लोग जानवरों पर जहर का लेप लगाकर खुला छोड़ देते थे, जब बाघ इनका शिकार कर मांस खाता तो जहर से उसकी मौत हो जाती। बाबरिया गिरोह के लोग और स्थानीय शिकारी बाघों की खाल, नाखून, दांत, मूछ के बाल आदि निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच देते थे। 2010 के बाद जब बाबरिया गिरोह टूटा तो स्थानीय लोगों ने गौढ़ी की आड़ में शिकार का धंधा करना शुरू कर दिया। अब बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों के लिए बाघ, तेंदुआ आदि जानवरों का शिकार कर रहे हैं।
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वन विभाग ने गौढ़ियां हटाने का शुरू किया अभियान
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि वन विभाग ने जब शिकार और शिकारियों के पुराने रिकार्ड खंगाले तो पता चला कि इन गौढ़ियों से दूध के कारोबार की आड़ में दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार हो रहा है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ ही उत्तर खीरी वन प्रभाग के संपूर्णानगर रेंज में करीब 40 गौढ़ियां वन विभाग की जमीन पर संचालित हैं। वनविभाग ने उन्हें हटाने का अभियान शुरू किया। पिछले दिनों कई गौढ़ियां हटाई गई तो यह उग्र विरोध पर उतर आए। गौढ़ी चलाने वाले लोगों ने वन विभाग पर गौढ़ी में आग लगाने, पशुओं को जिंदा जलाने आदि आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर दी है। अवैध रूप से चल रही इन गौढ़ी हटाने के मामले को राजनीतिक रंग देने का भी प्रयास किया जा रहा है।
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संपूर्णानगर रेंज में हटाई गई गौढ़ियों के संचालकों ने साजिशन पुराने मरे हुए जानवरों और कंकालों को मौके पर डालकर आग लगा दी और आरोप वनकर्मियों पर मढ़ दिया। बुधवार को मैं स्वयं इसकी जांच के लिए संपूर्णानगर गया था जांच में उनके आरोप गलत पाए गए। यह गौढ़ियां वन भूमि पर संचालित हो रही हैं। यहां से शिकार के अड्डे चल रहे है। हटाई गई गौढ़िया दोबारा फिर किसी कीमत पर नहीं लगने दी जाएंगी।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन