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जहां जन्मे हो, खेले हो वो हिंदुस्तान मत बेचो

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लखीमपुर खीरी। साहित्यिक संस्था साहित्यगंधा के तत्वावधान में शहर के चंदेल पैलेस में कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कुलदीप समर और ज्ञानेंद्र वत्सल के संयोजन में हुए इस कवि सम्मेलन में यशभारती सम्मान से सम्मानित सर्वेश अस्थाना भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीतकार राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक ने की।
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ज्ञानेंद्र वत्सल ने वाणी वंदना पेश कर कवि सम्मेलन का श्रीगणेश किया। अनुराग अतुल ने काव्यपाठ किया-हिला दे रूह जो संसद भवन तक की दीवारों की, लिखो कविता कोई ऐसी कि आंदोलन खड़ा कर दे। उन्नाव के कवि स्वयं श्रीवास्तव बोले-बहुत काली अंधेरी रात के साए में इक सूरज सामथ्र्य के बल पर निकलना सीख लेता है। छतरपुर के अभिषेक अरजरिया ने देशवासियों का आह्वान किया-नहीं जयचंद सा करना किसी गौरी को आमंत्रित, जहां जन्मे हो, खेले हो वो हिंदुस्तान मत बेचो।
हास्य कवि विकास बौखल ने कहा कि इस महंगाई में कन्हैया यदि आए कहीं सच कहता हूं रोटी दाल मार डालेगी, दो-दो सिम वाले हैं मोबाइल गोपियों के हाथ, पूरी पूरी रात मिस कॉल मार डालेगी। अभय सिंह निर्भीक ने कहा कि- सेना जिस दिन आत्म सुरक्षा में बंदूक उठाएगी, कश्मीर में पत्थरबाजी मिनटों में रुक जाएगी। ओज कवि प्रख्यात मिश्र ने कहा न्यायालय में केस चलाकर वक्त नहीं बरबाद करो, चौराहे पर खड़ा करो, गोली मारो आजाद करो। संयोजक कुलदीप समर ने कहा कि तुम्हारी और हमारी जिंदगी में एक अंतर है-तुम्हें इतिहास पढना है, हमें इतिहास लिखना है। आशीष अनल ने कहा- देश चाहता है कि अपनी संकल्प शक्ति ऐसी कर दो, इधर कन्हैया उधर ओबैसी की ऐसी तैसी कर दो। सर्वेश अस्थाना ने पैने व्यंग्य कहे और फारूक सरल ने लोकगीत गाए। अध्यक्षता कर रहे राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक ने अपने श्रंगार गीतों से समां बांधा। शाश्वत अभिषेक और राज किशोर पांडेय की रचनाओ को भी श्रोताओं ने खूब सराहा। मोहन बाजपेयी ने कवि आशीष अनल को सम्मानित किया।
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