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कागजों में ही मनाया जा रहा नवजात शिशु देखभाल सप्ताह

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 नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने 14 से 21 नवंबर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जिला के स्वास्थ्य अधिकारी नवजात बच्चों की देखभाल कार्यक्रम को लेकर उदासीन है, जिस कारण सप्ताह कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार सूबे में जन्म लेने वाले 1000 जीवित बच्चों में से 43 बच्चे असमय मौत का शिकार हो जाते हैं। यदि उनकी मां बच्चों को जन्म के पहले घंटे के भीतर ही स्तनपान कराना शुरू करते हुए छह माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं, तो बच्चों की मौत में कमी लाई जा सकती है। नवजात की मौत में कमी लाने के लिए ही बच्चों को छह माह तक स्तनपान कराने, उनकी बेहतर देखभाल करने के लिए गर्भवती एवं प्रसूताओं को जागरूक करने के लिए ही 14 से 21 नवंबर तक सप्ताह मनाया जाना है।

नवजात के लिए एक हजार दिन होते हैं खास
जिला महिला अस्पताल की प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी चौधरी का कहना है कि बच्चे के लिए गर्भधारण से लेकर एक हजार दिन बेहद खास होते हैं इसलिए गर्भावस्था के समय गर्भवती के खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए, बच्चे के जन्म के पहले घंटे के भीतर ही मां को स्तनपान कराना शुरू करना चाहिए, क्योंकि बच्चे के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण होता है। बच्चे को छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए, इसके बाद मां के दूध के साथ पूरक आहार देना शुरू करना चाहिए। बच्चे का नियमित टीकाकरण कराएं, इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
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नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाने के लिए अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है। यदि वह ऐसा नहीं कर रहे हैं तो यह बेहद गलत है। इसकी मॉनीटरिंग कराई जाएगी।
डॉ.मनोज अग्रवाल सीएमओ
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