वर्ष 2017 राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा। यह साल जहां भारतीय जनता पार्टी के लिए उपलब्धियों भरा रहा वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस के लिए काफी निराशाजनक साबित हुआ। लोकसभा चुनाव के बाद हासिए पर आई कांग्रेस विधानसभा चुनाव में भी अपना वजूद नहीं दिखा पाई। निकाय चुनाव में एक सीट हासिल होने से कांग्रेस को सांसें चलने का अहसास जरूर हुआ है। यह साल राजनीतिक निष्ठाएं बदलने में भी महत्वपूर्ण रहा।
भाजपा के लिए काफी
लकी रहा यह साल
बीत रहा साल चुनावी साल रहा। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आठों विधानसभा सीटें जीतकर जिले में इतिहास रच दिया। जिले के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय जनता पार्टी सभी सीटों पर जीतने में कामयाब हो पाई हो। इससे पहले कांग्रेेस पार्टी दो बार एक साथ सभी सीटें जीतने का रिकार्ड बना चुकी है। जिले के राजनीतिक इतिहास का यह पहला मौका है जब विधानसभा की सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हुआ है।
जिले में सपा बसपा का हुआ बुरा हाल
खीरी जिला पहले कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। सपा बसपा के उदय के बाद अरसे तक यह समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में यह गढ़ ध्वस्त हो गया। वर्ष 2012 के चुनाव में आठ में से चार सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी 2017 में एक भी सीट नहीं जीत पाई। कुछ यही हाल बसपा का भी रहा। बसपा 2012 के चुनाव में तीन सीटें जीती थी। इस बार उसका सूपड़ा ही साफ हो गया। भाजपा के सत्ता में आने के बाद समाजवादी पार्टी को अपनी जिला पंचायत अध्यक्ष समेत ब्लॉक प्रमुख के कई पदों से भी हाथ धोना पड़ा।
निकाय चुनाव में भी रहा भाजपा का दबदबा
विधानसभा चुनाव के बाद हाल में हुए निकाय चुनाव में भी भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा। हालांकि विधानसभा चुनाव जैसी सफलता नहीं मिली। फिर भी भाजपा दस में से चार सीटों पर कब्जा करने में कामयाब रही। सपा और कांग्रेस सिर्फ एक एक सीट जीत सकीं। पहली बार निकाय चुनाव में उतरी बसपा का सूपड़ा साफ हो गया।
कांग्रेस के लिए काफी निराशाजनक रहा
कभी कांग्रेस का गढ़ रहे खीरी जिले में कांग्रेस अब अरसे से कोमा में है। वर्ष 2009 में जिले की दोनों लोकसभा सीटें जीतने से पार्टी को संजीवनी मिली थी। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई। 2017 का चुनाव कांग्रेस ने सपा के साथ मिलकर लड़ा, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। निकाय चुनाव में जरूर कांग्रेस धौरहरा नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट जीतने में सफल रही है।
निष्ठाएं बदलने के लिए याद किया जाएगा यह साल
विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के आठ विधायकों में पांच विधायक ऐसे हैं जो दूसरी पार्टियां छोड़कर भाजपा प्रत्याशी बनकर चुनाव जीते थे। इनमें पलिया के विधायक रोमी साहनी, गोला विधायक अरविंद गिरि, धौरहरा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी और कस्ता विधायक सौरभ सिंह सोनू चुनाव के कुछ समय पहले ही बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। सदर विधायक योगेश वर्मा पीस पार्टी से भाजपा में आए थे।