लखीमपुर खीरी।
शहर के मोहल्ला शिव कालोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के चौथे दिन कथा व्यास आशीष भाई ने भगवान श्रीकृष्ण की कथा सुनाई। कथा प्रसंग में उन्होंने कहा कि सामान्य मनुष्य का जन्म होता है लेकिन जब मनुष्यों पर अत्याचार होने लगता है, तब प्रभु को दुष्टों का विनाश करने के लिए स्वयं धरती पर अवतरित होना पड़ता है।
मथुरा के राजा अग्रसेन थे और उनकी पत्नी का नाम पद्मावती था। कालिनेम नामक राक्षस ने उग्रसेन का रूप धारण कर पद्मावती के साथ सहवास किया। इसके फलस्वरूप कंस का जन्म हुआ। वह बड़ा अत्याचारी था। कथा प्रसंग में व्यास ने कहा कि राजा वही जो प्रजा का पालन-पोषण करे। कंस ने पिता को कारागार में डाल दिया। वर्ण शंकर संतान के कारण अग्रसेन जैसे धर्मात्मा राजा को अपना जीवन कारागार में बिताना पड़ा।
कथा व्यास ने कहा कि पता नहीं लोग बेटी क्यों नहीं चाहते? यदि इसी तरह बेटियों की भ्रूण हत्या होती रही तो सृष्टि का क्रम ही रुक जाएगा। कंस अपनी बहन देवकी को बहुत प्रेम करता था लेकिन जब देवकी की विदाई के समय आकाशवाणी हुई कि इसी देवकी का आठवां पुत्र तेरा काल होगा तो उसने वासुुदेव और देवकी दोनों को कारागार में डाल दिया। कारागार में ही श्रीकृष्ण का जन्म होता है। वासुुदेव बालक कृष्ण को नंद के घर भेज देते हैं। नंद के घर बधाइयां बजती हैं। हर तरफ आनंद का माहौल है। नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की। संगतकारों ने हमारों धन राधा श्री राधा श्री राधा, सतगुरू तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया। स्वागतम, कृष्णा स्वागतम कृष्णा जैसे सुंदर भजन सुनाए। कथा में एसएल पांडेय, रानी पांडेय ने चिन्मय मिशन की साध्वी सरस्वती, कथा व्यास हरिचरण आचार्य साध्वी संत कुमारी, नवनीत कुमार मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी और सोबरन लाल बाजपेयी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।