जंगल में आग के खतरे बढ़े,
निपटने के इंतजाम नहीं
न स्टाफ, न संसाधन, हर साल सिर्फ बनती है कार्ययोजना
- आग बुझाने में आज भी अपनाए जा रहे पुराने तरीके
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जंगल में आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग के पास संसाधनों का टोटा है। जंगल में आग बुझाने को वही पुराने और परंपरागत तरीके अपनाए जा रहे हैं जो अब से पचास-साठ साल पहले अपनाए जाते थे। आग से बचाव के लिए वन विभाग के पास अलग से न पर्याप्त स्टाफ है और न ही संसाधन। गर्मी की शुरुआत होते ही आग पर नियंत्रण के लिए वनविभाग एक कार्ययोजना बनाकर अपनी खानापूरी जरूर कर लेता है।
जिले में वन विभाग के तीन प्रभाग हैं। दुधवा नेशनल पार्क, दुधवा टाइगर रिजर्व का बफर जोन और दक्षिण खीरी वन प्रभाग। तीनों वन प्रभागों में कुल डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में घने जंगल हैं। जंगलों के बीच से निकलने वाले रास्तों पर आवाजाही के साथ जंगलों में इंसानों की दखलंदाजी के कारण गर्मी के मौसम में आग का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग आग से बचाव और आग लगने के बाद बुझाने के प्रबंध की योजना बनाता है।
सेटेलाइट के जरिए
आग पर रहेगी नजर
जंगल में लगने वाली आग पर सेटेलाइट से भी नजर रखी जा रही है। सेटेलाइट से मिली आग की सूचना देहरादून से मैसेज पर वनाधिकारियों को मिलती है, जिसके बाद संबंधित स्टाफ एलर्ट हो जाता है। जंगल में आग फैलने से रोकने को फायर लाइन कटिंग पूरी हो चुकी है। निगरानी के लिए वाचरों की तैनाती भी हो गई है, लेकिन आग लगने की स्थिति में यह मुट्ठी भर स्टाफ आग को काबू कैसे कर पाएगा यह बड़ा सवाल है।
जंगल में कैसे लगती है आग
जंगल से गुजरने वाले रास्तों पर राहगीरों के बीड़ी, सिगरेट पीकर बिना बुझाए डालने से।
जंगल या जंगल के किनारे चरवाहों के आग जलाकर खाना बनाने से।
नई घास के लिए चरवाहों द्वारा सूखी घास और पत्तियों में आग लगाने से।
जंगल में अवैध कटान को छिपाने के लिए।
शिकार के उद्देश्य से शिकारी भी आग लगाते हैं।
आग से बचाव को वनविभाग करता है यह इंतजाम
फरवरी में फायर लाइन की कटाई का काम
रोड साइड के दोनों ओर फायर लाइन की कटाई।
क्यू प्वांइट पर फायर वाचरों की तैनाती।
जंगल के आसपास बसे गांव के लोगों को आग से बचाव के लिए जागरूक करना।
कैसे बुझाते हैं जंगल की आग
. आग को झाड़ियों से पीट कर।
. आग फैलने की दिशा में सूखी पत्तियों को हटाकर आग फैलने से रोकना।
. भीषण आग लगने पर नदियों और तालाबों से पानी लाकर उसे बुझाया जाता है।
गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग ने आग से बचाव की तैयारी पूरी कर ली है। आग के खतरे से निबटने के लिए वनविभाग ने जंगल की निगरानी बढ़ा दी है। इसके अलावा सेटेलाइट से भी जंगल की आग पर नजर रखी जा रही है।
- डॉ. अनिल पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन