लखीमपुर खीरी। किसानों की कर्जामाफी के लिए बनाई गई फसली ऋण मोचन योजना में डुप्लीकेसी को रोकने के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। आधार और भूलेख के माध्यम से सरकार के पास लाभार्थी किसान का पूरा बायोडाटा सुरक्षित हो जाएगा। आधार न होने पर सहमति पत्र देना होगा। खास बात यह है कि जिन किसानों का आधार नंबर फीड नहीं होगा, उन्हें ऋण संबंधी सूचना पत्र डीएम द्वारा भेजे जाएंगे। इसके बाद जिला स्तरीय समिति की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
बता दें कि बैंकों से कर्जा लेने वाले लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या करीब 3,42,009 है, जिन पर 25 अरब 26 करोड़ रुपये ऋण बकाया है। इसमें 2,21,472 सीमांत (एक हेक्टेयर) और 1,20,537 लघु किसान (दो हेक्टेयर) हैं। जबकि जिला सहकारी बैंक ने 95456 किसानों की सूची ऋण मोचन के लिए प्रस्तुत की है, जिनमें 47204 किसानों का 40 करोड़ माफ होना है। शेष 48252 किसानों पर बकाया 86 करोड़ एनपीए हो चुका है, जिनके लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। डीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति ने ऋण मोचन योजना के मुताबिक क्रियान्वयन की दिशा में कार्यवाही शुरू कर दी है। सभी नोडल बैंक निर्धारित प्रारूप पर लघु एवं सीमांत किसानों का डाटा टेंपलेट चार जुलाई 2017 तक कृषि विभाग को मुहैया कराएंगे। इसके बाद जिला स्तरीय समिति पात्र किसानों की सूची का परीक्षण करेगी। शनिवार को एनआईसी में हुई वीडियो कांफ्रेसिंग में शासन से मिले निर्देशों में समयबद्धता पर भी जोर दिया गया है। लिहाजा जिला स्तरीय समिति के सहसचिव ने सभी नोडल बैंकों से वेब पोर्टल के माध्यम से सूची चार जुलाई 2017 तक मांगा है।
बैंकों को मिलेगा 10 दिन का समय
जिला स्तरीय समिति द्वारा निर्णय लिए जाने के बाद लाभार्थियों की सूची बैंकों को उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके बाद 10 दिन में ही समस्त कार्यवाही पूर्ण कराते हुए प्रमाण पत्र वितरित करना होगा। आधार न होने की दशा में किसान से सहमति पत्र लिया जाएगा।
सत्येंद्र प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी