लखीमपुर खीरी। जंगल के आसपास बसे गांवों में शिकारी और अवैध असलहे तलाशने के लिए सर्च अभियान चलेगा। इस संबंध में उप निदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि जंगल के आसपास बसे करीब 200 गांवों के लोग अवैध असलहे लेकर वन्यजीवों का शिकार करने के अलावा लकड़ी का कटान भी करते हैं।
यहां बता दें कि दुधवा टाइगर रिजर्व के अंदर और बाहरी किनारों पर 200 से अधिक गांव बसे हुए हैं। इन गांवों के इर्द-गिर्द शिकार और पेड़ कटान की घटनाएं होती हैं। लोग न केवल वन्यजीवों के शिकार में माहिर हैं, बल्कि जंगल के रास्तों के जानकार भी हैं। वन विभाग की कार्रवाई होने पर यह शिकारी और वन अपराधी आसानी से भाग कर जंगल में गुम हो जाते हैं। शनिवार को जब वन विभाग ने शिकार के लिए खाबड़ लगाए जाने की सूचना पर नौनिया 2ए बीट में छापा मारा तो शिकारी वन विभाग की टीम पर फायरिंग करते हुए जंगल के रास्ते ही भाग निकले थे।
बाद में वन विभाग ने एसडीओ पलिया डीबी सिंह के नेतृत्व में कई रेंज अधिकारियों और एसटीपीएफ के डिप्टी एसपी अभिनव यादव समेत 50 वनकर्मियों की टीम बनाई तो कई जगह दबिश देने के बाद तीन शिकारी वन विभाग के हत्थे चढ़ सके। करीब दस शिकारी अभी वन विभाग की पकड़ से बाहर हैं। इन शिकारियों को तलाशना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में जंगलों के आसपास बसे गांवों में सर्च अभियान चलाकर अपराधियों पर शिकंजा कसे जाने की जरूरत है।
अपराधियों के पास अवैध असलहों का जखीरा
मझगई रेंज में जिस तरह शिकारियों ने वन विभाग पर फायरिंग करते हुए हमला किया उससे साबित हो गया इन शातिर अपराधियों ने असलहों का जखीरा जमा कर रखा है। मौके से वनकर्मियों ने आठ खाबड़ बरामद किए हैं। इन खाबड़ का आकार सामान्य से काफी बड़ा है। एक खाबड़ तो 46 फुट लंबा है। इससे भी इनके शातिर शिकारी होने की पुष्टि होती है। यह भी साबित होता है कि यह सुनियोजित ढंग से शिकार करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों से जुड़े हैं इनके तार
वन विभाग के मुताबिक जंगल से सटे गांव जैसे संपूर्णानगर रेंज के नरौसा, कांपटांडा, किशनपुर के चलतुआ, मझगईं के मुंशीगढ़, तिनघरा समेत मैलानी रेंज के आसपास बसे गांव शिकार और पेड़ों के कटान आदि मामलों में बदनाम रहे हैं। मैलानी रेंज में हाल ही में वन अपराधियों ने वनरक्षक सुखपाल की गश्त के दौरान नृशंस हत्या कर दी थी। जंगल से सटे गांव में रहने वाले शिकारियों के तार अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करों तक से जुड़े हुए हैं। पिछले दिनों पकड़े गए शिकारियों से पूछताछ में भी यह बाद पूरी तरह साबित हो चुकी है।
ज्वांइट पेट्रोलिंग और सर्च अभियान से रोकेंगे अपराध
दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल से सटे गांवों के पास हो रही शिकार और वन कटान आदि की घटनाओं को रोकने के लिए ज्वांइट पेट्रोलिंग की योजना बनाई है। इस पेट्रोलिंग में वनकर्मियों के अलावा एसटीपीएफ, एसएसबी और पुलिस को भी शामिल किया जा रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि जल्दी ही जंगल के आसपास बसे गांवों में सघन सर्च अभियान चलाया जाएगा। वन अपराधियों को चिह्नित कर उनपर नजर रखी जाएगी। यदि उनके पास अवैध असलहे बरामद होते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम और एसपी को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया गया है कि वह मझगईं रेज के मुंशीगढ़ और तिनघरा समेत जंगल से सटे गांवों में अवैध असलहों की तलाश में सघन सर्च अभियान चलाएं। ताकि शिकार और वनापराध से प्रभावी ढंग से निबटा जा सके। इसके अलावा वनविभाग अपने स्तर से वनापराधियों को चिह्नित कर उनकी गतिविधियों पर विशेष रूप से नजर रखेगा।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन।