जिले के गोलागोकर्णनाथ, लिलौटीनाथ, टेढ़ेनाथ आदि प्राचीन शिव मंदिरों में दूर-दूर से कांवड़िये गंगाजल लाकर जलाभिषेक करते हैं। सावन माह में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। इस दौरान बहुत से श्रद्धालु इन कांवड़ियों के लिए भंडारा आदि का आयोजन कर उनके लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं।
शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर गोलागोकर्णनाथ रोड पर लालपुर बैरियर के पास श्रद्धालुओं की एक टोली ने कांवड़ियों के लिए विशेष सेवा पंडाल लगाया है। यहां सावन माह के तीसों दिन 24 घंटे भंडारा चल रहा है। हर समय कांवड़ियों के लिए ताजे भोजन के साथ-साथ उनके ठहरने, नहाने, कपड़े बदलने आदि की पूरी व्यवस्था की गई है। कावंड़ियों के सोने के लिए तखत, बिस्तर, नहाने के लिए साबुन, शैंपू, तेल, मंजन, कपड़े धोने के लिए डिटर्जेंट पाउडर आदि की भी व्यवस्था है।
इतना ही नहीं इस सेवा पंडाल में कांवड़ियों के लिए डॉक्टर और दवाओं की व्यवस्था भी पूरी तरह मुफ्त है। शिवभक्तों की टोली दिन रात जागकर कांवड़ियों की सेवा में लगी हुई है। टीम के सदस्य नटवर सिंह ने बताया कि लोगों के सहयोग से कांवड़ियों के लिए पिछले कई साल से सेवा पंडाल लगाया जा रहा है।
कांवड़ियों की सेवा करने वाली श्रद्धालुओं की टीम में नटवर सिंह के अलावा सर्वेश वर्मा, सतीश मिश्र, आशीष गुप्ता, अनिल गुप्ता और सूरज राठौर आदि शामिल हैं। इनका कहना है कि कांवड़ियों की सेवा कर उन्हें शिवभक्ति का पूरा आनंद मिल रहा है।