पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के जंगल के पास बसे गांवों में जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ गई है। शनिवार को घोला स्थित एक खेत में ग्रामीणों ने बाघ को देखा। इससे उनमें हड़कंप मच गया। ग्रामीणों के मुताबिक बाघ के पगचिह्न भी खेतों में दिखाई दिए हैं।
इन दिनों दुधवा जंगल के निकट बसे गांवों में जंगली जानवरों की गतिविधि बढ़ गई हैं। कहीं जंगली हाथी फसलों को तबाह कर रहे हैं तो कहीं बाघ, तेंदुआ आबादी में घुस जाते हैं। कुछ समय तक शांत रहने के बाद इधर फिर से बाघ की लोकेशन जंगल से सटे गांवों के आस पास बनी हुई है। शनिवार की सुबह घोला गांव स्थित एक खेत में ग्रामीणों ने बाघ को देखा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों के मुताबिक खेतों में बाघ के पगचिह्न भी दिखाई दिए हैं। फिलहाल इसकी सूचना वन विभाग को दे दी गई है।
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बाघ के हमले में मृत ग्रामीण के आश्रितों को नहीं मिली सहायता
ममरी। मोहम्मदी रेंज में 19 नवंबर को बाघ द्वारा मारे गए महेशपुर निवासी ओमप्रकाश (45) के आश्रितों को अभी तक 10 हजार रुपये की भी तात्कालिक सहायता राशि नहीं मिली है।
ओमप्रकाश की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय के सामने सड़क जाम कर हंगामा किया था, तो नायब तहसीलदार विकासधर दुबे, सीओ विजय आनंद, रेंजर एसएन यादव ने भीड़ को समझा बुझाकर जाम खुलवाया था। मृतक की पत्नी बेहसा देवी और अन्य लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें तात्कालिक सहायता के रूप में दस हजार रुपये दिलाने का आश्वासन दिया था, जो अब तक नहीं मिले हैं। रेंजर एसएन यादव का कहना है कि हमले में मरने वाले परिवार के मुखिया को दस हजार रुपये की सहायता डब्ल्यू डब्ल्यू एफ परियोजनाधिकारी की ओर से दी जाती है, जो बीमार हैं। पांच लाख रुपये उनके विभाग की ओर से दिए जाते हैं, जिसके लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि की आवश्यकता होती है। वह अभी तक नहीं मिल पाए हैं।