नेताओं की मनमानी और पुलिस की साठगांठ से जिले में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग खनन के अवैध कारोबार में घुस गए हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओं के चेले हैं। लखीमपुर, गोला गोकर्णनाथ और फुलबेहड़ के कई हिस्ट्रीशीटर इस अवैध कारोबार से जुड़े हैं। खनन पर सरकार की सख्ती का फायदा उठाकर मिट्टी और बालू ब्लैक में बेचकर हर महीने लाखों का मुनाफा कमाया जा रहा है। इस कमाई का हिस्सा पुलिस और नेताओं की जेब में भी जा रहा है। ये माफिया इतने बेखौफ हैं कि दिन में खुलेआम खनन करते हैं। कोतवाली सदर, थाना फूलबेहड़ और कोतवाली गोला गोकर्णनाथ के इलाकों में कभी भी दिन में अवैध खनन होते देखा जा सकता है। इस दौरान थानों और चौकियों की पुलिस रेत और मिट्टी से भरी ट्रॉलियों को सुरक्षित निकलवाने में लगी रहती है। यही एक बड़ी वजह है कि इस दौरान सड़क पर कोई वारदात होने की सूचना मिले तब भी पुलिस वक्त से नहीं पहुंचती। रेत-मिट्टी से भरी ट्रालियों में पैसा वसूली का खेल इस कदर पुलिस पर हावी है कि बालू और मिट्टी की ट्राली देखते ही पुलिस की मोबाइल गाड़ियां और यूपी 100 पर तैनात पुलिस वाले उन पर लपक पड़ते हैं।
योगी सरकार बनने से पहले मिट्टी काफी सस्ती मिल जाती थी। पर इन दिनों घर बनाने के लिए मजबूरी में लोगों को तीन से साढ़े तीन हजार रुपये तक में एक ट्राली मिट्टी लेनी पड़ रही है। खनन पर सरकार से सख्त नियमों का खनन माफिया पूरा फायदा उठा रहे हैं। पिछले दिनों गोला से भाजपा विधायक अरविंद गिरि ने अवैध खनन को मुद्दा बनाते हुए डीएम से शिकायत की थी। साथ ही खनन बंद न होने पर मुख्यमंत्री तक इस मामले को ले जाने की चेतावनी दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में बालू महज एक हजार से 12 सौ रुपये और मिट्टी की ट्रॉली पांच सौ रुपये तक में बिकवाने का निर्देश एसडीएम को दिया था। साथ ही अवैध खनन बंद कराने को कहा था। हालांकि आज तक विधायक के निर्देशों का इस पर अमल नजर नहीं आ रहा है।
उधर, विधायक अरविंद गिरि का कहना है कि उनके क्षेत्र में उचित मूल्य पर मिट्टी मिलने की बाबत डीएम और खनन अधिकारी से फाइनल वार्ता हो चुकी है। जल्द ही इसका असर दिखाई देने लगेगा।
सिंगाही और बेलरायां क्षेत्र में भी नहीं रुक रहा रेत खनन
- गांव सिंगहाखुर्द और मोतीपुर के हैं खनन माफिया
- थाना सिंगाही के मोतीपुर से गुजरी जौराहा नदी पर इन दिनों खनन-माफियाओं की नजर है। दिन हो या रात खनन माफिया बेधड़क मोतीपुर गांव के मजरा भौका, ग्राम मांझा, भैरमपुर आदि के पास से रेत का अवैध खनन करते हैं। बालू भी इन ट्रैक्टर ट्रॉलियों को बेलरायां-सिंगाही मुख्य मार्ग से निकाला जाता है। इन माफिया को पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का कतई भय नहीं। दो महीने से ग्राम सिंगहा खुर्द और मोतीपुर गांव के कुछ खनन माफिया इस कारोबार को बखूबी चला रहे हैं। खनन पर प्रतिबंध होने के कारण यह खनन माफिया एक ट्रॉली बालू चार से पांच हजार रुपये में बिक्री करते हैं। बालू की सप्लाई सिंगाही के अलावा कोतवाली कोतवाली तिकुनियां क्षेत्र में भी की जाती है। करीब 20 दिन पूर्व कानूनगों ने सिंगहा खुर्द निवासी खनन माफिया की ट्रॉली बेलरायां मार्ग पर पकड़ी थी, जिसे बेलरायां चौकी पुलिस को सुपुर्द कर दिया था।
सुरक्षा कवच बनकर ट्रॉलियों के पीछे चलती है यूपी 100
थाना सिंगाही क्षेत्र में प्रतिदिन सूर्य अस्त होने के बाद भौका और माझा घाट से खनन माफिया की रेत भरी ट्रॉलियों का आनाजाना शुरू हो जाता है। एक साथ तीन से चार ट्रॉलियां निकलती हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इन ट्रॉलियों से कुछ ही दूरी पर यूपी 100 की गाड़ी भी रहती है। इससे यूपी 100 भी सवालों के घेरे में आ गई है।
अब पट्टा धारक के कंप्यूटर से निकलेगा रवन्ना
लखीमपुर। सरकार की नई खनन नीति के तहत अब खनन विभाग किसी पट्टा धारक को रवन्ना बुक जारी नहीं करेगा। पट्टा लेने वालों को एक कंप्यूटर सिस्टम खरीदना होगा। खनन निदेशालय से सीधे पट्टा धारक के ई-मेल पर कोड मिलेगा। इसके जरिए वह खुद ही रवन्ना निकाल पाएगा। खनन इंस्पेक्टर सुखेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में जिन तीन लोगों को खनन के पट्टे जारी किए गए हैं। वह सभी पहली अक्तूबर से अपना कंप्यूटर सिस्टम लगाकर रवन्ना निकालेंगे।
बिना अभिलेख खनिज मिला तो होगी कार्रवाई
प्रभारी खनन/एडीएम उमेश नरायण पांडेय ने बताया कि जिले में उपलब्ध उपखनिजों यानी मौरंग, गिट्टी, पत्थर, साधारण बालू, साधारण मिट्टी एवं अन्य जनपदों से परिवहन कर जाए जा रहे उपखनिजों को खरीदते समय खरीदार खरीदे गए खनिजों के परिवहन पास अवश्य ले लें और उसे सुरक्षित रखें। यदि किसी खरीदार के पास खनिज एकत्र पाया जाता है और जांच के समय संबंधित अभिलेख नहीं दिखा पाता है तो एकत्रित खनित को अवैध मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
इस तरह मिलता है पट्टा
खनन अधिकारी से पट्टा लेने के लिए लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। पट्टे के लिए माइनिंग प्लान खनन निदेशालय से जारी होता है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में खनन के आवेदनों पर विचार करने के लिए कमेटी बनी है। कमेटी की संस्तुति के बाद पर्यावरण प्रमाण पत्र मिलता है। इसके बाद पट्टे की फाइल पर डीएम की अध्यक्षता में बना कमेटी फाइनल रिपोर्ट लगाती है। प्रति घनमीटर के हिसाब से पट्टा धारक को पहले ही रॉयल्टी भी जमा करानी होती है।
333 ट्रॉली मिट्टी होती है एक हजार घन मीटर में
खनन अधिकारी के मुताबिक एक हजार घन मीटर में करीब 333 ट्रॉली मिट्टी निकलती है। एक ट्रॉली में तीन से चार घन मीटर मिट्टी आती है। अब तक जो रवन्ना मिलता था, उस पर 24 घंटे लिखा होता था। पट्टा धारक एक ही रवन्ने से दिन भर ट्राली चलाते थे। मिट्टी कम होना दर्शाते ही नहीं थे। कंप्यूटर से निकलने वाले रवन्ने में कंप्यूटर उनके पट्टे से मिट्टी कम करता रहेगा। एक ही रवन्ने से कई बार ट्राली कोई नहीं ले जा पाएगा।
अवैध खनन किसी भी हाल में नहीं होने दिया जाएगा। तहसील क्षेत्र में अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी एडीएम की है। साथ ही पुलिस अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। अवैध खनन रोकने मेें किसी भी स्तर पर ढिलाई हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- आकाशदीप, डीएम