बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। कुकरा गांव में छह दशक पुराने बांकेगंज पशु चिकित्सालय से संबद्ध पशु सेवा केंद्र को चकबंदी विभाग ने उड़ाकर दूसरी जगह पहुंचा दिया। जहां पर मवेशियों का इलाज होता था उस भूमि को राजस्व और चकबंदी विभाग ने अभिलेखों में नवनी परती के नाम से दर्ज कर दिया है। हालांकि पशु चिकित्सालय की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और पशु चिकित्सक को जर्जर पंचायत भवन में बैठकर पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है।
आजादी के पांच साल बाद कुकरा के राजा जमीलुर्रहमान के प्रयास से कुकरा कस्बे में सरकारी पशु सेवा केंद्र की स्थापना हुई थी। इस पशु सेवा केंद्र के लिए राजा कुकरा ने जगह भी दी। पशु सेवा केंद्र बनने के बाद भी यह भूमि गाटा संख्या 1201 रकबा 0.093 हेकेटयर/ 0.23 डिसमल राजस्व अभिलेखों में पशु चिकित्सालय दर्ज हुई थी। तब से इसी जगह पर पशु चिकित्सालय चलता आ रहा था। कुछ साल पहले यह इमारत जर्जर होकर निष्प्रयोज्य हो गई। इसके चलते पशु सेवा केंद्र पर तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. प्रताप सिंह पंचायत भवन के एक जर्जर कमरे में बैठकर पशुओं का इलाज करने लगे।
इस बीच इलाके में हुई चकबंदी के दौरान चकबंदी विभाग ने एक बड़ा कारनामा कर डाला। पशु चिकित्सालय की भूमि को नवीन परती में दर्ज कर उसका उड़ान कर दिया। यह उड़ान चक कस्बे से एक किलोमीटर दूर सुनसान स्थान पर पहुंचा दिया गया और उस भूमि की गाटा संख्या पर केवल चिकित्सालय दर्ज कर दिया गया।
इस कारनामे का खुलासा तब हुआ जब जर्जर बिल्डिंग की जगह नई इमारत बनाने की योजना बनी। पशु चिकित्सक ने जब गोला तहसील से भूमि का इंतखाब आदि निकलवाया तो पता चला कि राजस्व अभिलेखों में पशु चिकित्सालय अपनी जगह से गायब हो चुका है। उसकी जगह नवीन परती के नाम से नाम दर्ज है। बांकेगंज और कुकरा के पशु चिकित्सा अधिकारियों ने इस मामले की पूरी पत्रावली तैयार कर विभागीय उच्चाधिकारियों को भेजी है।
वर्जन
1
बांकेगंज पशु चिकित्सा अधिकारी से जानकारी मिली है। मामले को दिखवा रहा हूं। इस संबंध में डीएम से बात कर मामले का हल निकाला जाएगा।
डॉ. पीके तिवारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
2
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मामला संज्ञान में आते ही उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई होगी।
आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार, गोला
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