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लालसिंह के झाले पर चौथी बार घुसा बाघ

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फोटो-22एलकेएच208
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लालसिंह के झाले पर चौथी बार घुसा बाघ, दहशत
- सुंदरपुर गांव की आबादी के निकट टहलता दिखा तेंदुआ
अमर उजाला ब्यूरो
ममरी। शुक्रवार की रात घमहाघाट निवासी सरदार लालसिंह के झाले में चौथी बार घुस आए बाघ ने मच्छरदानी के भीतर बंधे पशुओं पर हमला करने के लिए काफी देर तक उत्पात मचाया, उधर, सुंदरपुर गांव की आबादी के करीब चकरोड पर एक तेंदुआ टहलते देखा गया। बाघ और तेंदुए की गन्ने के खेतों में चहलकदमी बढ़ने से क्षेत्रवासियों में फिर दहशत फैल गई है। बाघ के झाले में घुसने, पगचिह्न मिलने की पुष्टि वनकर्मियों ने भी की है।
शुक्रवार की रात सरदार लालसिंह के परिवार के सदस्य किसी कार्यक्रम में भाग लेने मैलानी गए थे, महिलाएं झाले पर मौजूद थीं। लालसिंह ने जंगली जानवरों से पशुओं को बचाने के लिए पशुवाड़े में चारों तरफ मच्छरदानी की व्यवस्था की है। उनका कहना है कि जंगली पशु मच्छरदानी के भीतर घुसने की कोशिश नहीं करते हैं, क्योंकि वह उन्हें जाल प्रतीत होता है। लालसिंह के अनुसार आधी रात के करीब गन्ने में विचरण करता हुआ बाघ उनके झाले में घुस आया और पशुओं पर हमला करने के इरादे से मच्छरदानी के चारों ओर घूमने लगा। पशुओं के रंभाने पर महिलाओं ने मकान की छत पर चढ़कर जब शोर मचाया तो बाघ वहां से भागकर गन्ने में घुस गया। देवीपुर बीट के जंगल से 500 मीटर की दूरी पर बने लालसिंह के झाले में बाघ इससे पहले भी तीन बार घुसकर उत्पात मचा चुका है। झाला निवासी कश्मीर सिंह, अंग्रेज सिंह, जगदीश सिंह, बख्शीश सिंह, सुंदरपुर के बीडीसी रामकुमार वर्मा आदि का कहना है कि पिछले हफ्ते बाघ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे डीएफओ डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बाघ की रोकथाम के लिए जंगल में झाले तक स्ट्रीट लाइटें लगवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन लाइट लगवाने से पहले ही बाघ फिर झाले पर धावा बोल चुका है, जिससे क्षेत्र में फिर दहशत फैल गई है।
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जब राहगीरों के सामने आ खड़ा हुआ तेंदुआ, उड़े होश
शुक्रवार की सुबह सुंदरपुर के योगेंद्र, सुरेश, सर्वेश वर्मा, लालाराम बाइक से अयोध्यापुर गांव जा रहे थे, उनकी बाइक के जैसे ही गांव से 200 मीटर दूर पहुंची वैसे ही माता भगवती सत्संग स्थल के पास एक तेंदुआ गन्ने से निकलकर रास्ते में आ गया, जिसे देख कर उनके होश उड़ गए। उन्होंने वापस लौटकर जान बचाई, जिसकी पुष्टि सुंदरपुर के ग्रामीणों ने भी की है। गांववालों की सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक राजेश ने भी बाघ के झाले में घुसने की पुष्टि की है। रेंजर बनारसीदास मौर्य का कहना है कि सुंदरपुर क्षेत्र में जिधर देखो उधर गन्ना ही गन्ना दिखाई दे रहा है इसी कारण बाघ गन्ने को जंगल समझकर आबादी की ओर पहुंच जाता है, उन्होंने गांव वालों से सतर्क रहने, खेतों में समूह बनाकर जाने की सलाह दी है। रेंजर ने किसानों से अगले सीजन में जंगल से सटे खेतों में गन्ने की बुवाई न करने की हिदायत दी है।
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इन गांव में है बाघ की दहशत
ममरी। वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर क्षेत्र के कठिना नदी और जंगल के पास बसे बिहारीपुर फार्म तूलमेलगंज, नयागांव, कन्हैयागंज, अशर्फीगंज, महेशपुर, राम दीनपुर, मोतीपुर, अयोध्यापुर, मुल्लापुर, बोझवा, घमहाघाट, सुंदरपुर, परवस्तनगर, मौठीखेड़ा, देवीपुर, पल्हनापुर, शिवपुरी, सुभाषनगर के इर्द-गिर्द बाघ और तेंदुए की चहलकदमी बनी रहती है। बाघ के सर्वाधिक हमले जंगल के उत्तरी भाग में होते हैं, जिसकी मुख्य वजह दक्षिणी भाग की अपेक्षा उत्तरी भाग में जंगल से सटे खेतों में गन्ने का एरिया बाहुल्य होना बताया गया है, जिसकी पुष्टि डीएफओ डॉक्टर अनिल कुमार पटेल, एसडीओ रविशंकर शुक्ला, रेंजर बनारसीदास मौर्य ने भी की है।
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