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न चौका न चूल्हा प्रसूताओं को पौष्टिक भोजन देने का दावा

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चौका न चूल्हा, प्रसूताओं को पौष्टिक भोजन देने का दावा
खाद्य सुरक्षा में पंजीकरण और भोजन गुणवत्ता की निगरानी भी नहीं हो रही
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। प्रसूताओं को पौष्टिक भोजन देने के दावों की पोल तो व्यवस्थाएं ही खोल रहीं हैं। बांकेगंज सीएचसी में न तो खाना बनाने के लिए रसोई है और न उसका खाद्य सुरक्षा से पंजीकरण ही। प्रसूताओं को खाना देने के लिए अस्थाई व्यवस्था के तहत दूसरों के घरों से खाना बनवाया जा रहा है। जहां न तो सफाई व्यवस्था है और न ही गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर संस्थागत प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के लिए पौष्टिक भोजन दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए प्रत्येक सीएचसी में किचन होना जरूरी है। खाना बनाने की व्यवस्था ठेकेदारी सिस्टम के तहत की जाती है। जिसका खाद्य सुरक्षा से पंजीकरण भी जरूरी है। सीएचसी में पंजीकृत ठेकेदार को ठेका तो दिया गया है लेकिन ठेकेदार ने किचन की कोई व्यवस्था नहीं की है। बल्कि वह किसी घर से खाना बनवाकर प्रसूताओं को दे रहा है। खाद्य सुरक्षा के तहत पंजीकरण न होने से न गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। इसमें न पौष्टिकता है न गुणवत्ता। इससे अधिकांश महिलाएं यह खाना पसंद नहीं करतीं हैं।
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अधीक्षक की जिम्मेदारी है कि प्रसूताओं को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता,पौष्टिकता, स्वच्छता और खाना बनाने के तौर तरीकों पर ध्यान दिया जा रहा है। यही नहीं इसमें प्रयोग किए जाने वाले राशन,तेल,घी,मसाले आदि की निगरानी करें, लेकिन अधीक्षक इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसको लेकर बांकेगंज सीएचसी में संस्थागत प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और तीमारदारों में रोष है। जहां तक अन्य स्टाफ की बात है वह अधीक्षक की जिम्मेदारी होने की बात कहकर मामला टाल देते हैं।
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मामला संज्ञान में आया है। बांकेगंज सीएचसी में प्रसूताओं को परोसे जाने वाले भोजन गुणवत्ता की जांच के बाद अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
-डॉ. बलबीर सिंह,एसीएमओ
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