फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुधवा से सटे इलाके के 50 गांव बाघ की दहशत में

विज्ञापन
विज्ञापन
दुधवा से सटे 50 गांवों में
विज्ञापन

बाघ-बाघिन की दहशत
- किसान नहीं काट पा रहे गन्ना, वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में बढ़ रहा गुस्सा
केके मौर्या
निघासन।
दुधवा नेशनल पार्क जंगल से सटे सिंगाही और निघासन इलाके के करीब 50 गांवों के लोग बाघ-बाघिन की दहशत के साए में जी रहे हैं। गन्ने के एक खेत से दूसरे खेतों में भटक रहे बाघ-बाघिन ग्रामीणों को ही नहीं वन विभाग को भी खूब छका रहे हैं। शावकों के साथ बाघिन के देखे जाने के बाद वन विभाग ने बाघिन की मौजूदगी की पुष्टि की थी। अब यहां बाघिन के अलावा एक नर बाघ की लोकेशन भी मिलने की बात कही जा रही है। इससे ग्रामीण और ज्यादा दहशत में आ गए हैैं। ग्रामीण खेतों में गन्ना छीलने और खेत की रखवाली करने से कतरा रहे हैं। उधर, वन विभाग की लाचारी से ग्रामीणों में गुस्सा भड़क रहा है।
बाघ और बाघिन करीब 70 वर्ग किलोमीटर के दायरे में आतंक मचाए हुए हैं। अब तक यह एक किसान पर हमला करके घायल करने के साथ कई पालतू मवेशियों को अपना निवाला बना चुुके हैं। निघासन क्षेत्र में 11 फरवरी को बाघिन ने गांव गजियापुर में एक गाय को अपना निवाला बनाया था। उसके बाद बाघिन सिंगाही थाने के गांव टांडा पहुंची। वहां पर भी एक बैल को मारने की कोशिश की। उसके बाद बाघिन नौरंगाबाद, अइली, फरदहिया, करदहिया, घोसियाना होते हुए तकिया जंगल पहुंची। वहां से बाघिन ने एक बार फिर अपना मूवमेंट निघासन थाने के गांव गोविंदपुर फार्म की ओर किया। यहां पर भी उसने एक बकरी को मारने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों की सक्रियता के चलते वह गन्ने के खेत में पहुंच गई। उसके बाद बौधिया कलां पहुंची। वहां से फिर उसने अपना रुख खैरहनी की ओर किया। यहां पर एक घोड़ी को मारने के बाद दो दिनों तक उसकी लोकेशन नहीं मिली। फिर वह चखरा के गांव बलदेवपुरवा में देखी गई। शनिवार की शाम सिंगाही थानाक्षेत्र के गांव सहिजना पहुंची। वहां उसने गाय को अपना निवाला बनाया। उसी रात सिंगहा कलां में बाघिन ने एक बैल का शिकार किया। इसके बाद मांझा में बाघ की लोकेशन मिली और वहां उसने एक बकरी को निवाला बनाया।
विज्ञापन


इन गांवों में है बाघिन की दहशत
गजियापुर, बैरिया, डंडूरी, सरपतहा, कट्ठौहा, लट्ठौहा, बाबा गंज, बिछ़ुली, ढखेरवा नानकार, पसियनपुरवा, गोबिंदपुर फार्म, लुधौरी, दुबहा, खैरहनी, बम्हनपुर, बौधिया कलां, रमुआपुर, बौधिया खुुर्द, बल्लीपुर इसके अलावा सिंगाही थाने के गांव नौरंगाबाद, अइली, फरदहिया, करदहिया, घोसियाना, ठाकुर पुरवा, सहिंजना, मांझा, बेनीपुरवा, सिन्हौना, अयोध्यापुरवा, तकियापुरवा, बंगलहा, सिंगहा, निबौरिया आदि गांवों में बाघ की दहशत है।

क्या कहते हैं लोग
बेलरायां चीनी मिल उपाध्यक्ष अमन दीप सिंह, नौरंगाबाद प्रधान बवरपाल सिंह, मांझा प्रधान संतोष ने कहा कि वनविभाग को गंभीरता से लेते हुए बाघ और बाघिन को पकड़कर जंगल में छोड़ देना चाहिए। ऐसे ही जंगली जानवर जंगल से बाहर भटकते रहे तो कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

मैटिंग सीजन में बाघ बाहर आते हैं
राज्य वन्य जीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि इन दिनों बाघों का मैटिंग सीजन चल रहा है। मैटिंग सीजन में बाघ जंगल से बाहर आ जाते है। ऐसे में बाघ और बाघिन साथ रहते हैं। बेलरायां रेंज में केवल बाघिन नहीं, बल्कि बाघ भी है। यदि इन्हें डिस्टर्ब न किया जाए तो यह स्वत: जंगल लौट जाएंगे।
विज्ञापन


बेलरायां रेंज में बाघ और बाघिन होने की सूचना मिली है। वन विभाग की टीमें इन्हें खदेड़कर जंगल वापस भेजने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों से अनुरोध है कि वह वन विभाग की टीमों को काम करने दें। बाघ और बाघिन को डिस्टर्व न करें। साथ ही जंगल जाते समय पूरी सावधानी बरतें। जाना हो तो समूह में जाएं।
- डॉ. अनिल पटेल, उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें