लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन डॉक्टर एवं स्टाफ नर्सों को नवजात में जन्मजात होने वाली बीमारियों की पहचान करने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आरपी दीक्षित ने कहा कि जन्म के बाद नवजात का विशेष रूप से निरीक्षण करें, जिससे उसमें जन्मजात बीमारियों का पता लग सके।
उन्होंने कहा कि टार्च से नवजात की आंखें देखें, उसमें सफेदी दिखाई देना मोतियाबिंद की पहचान है। वहीं रीढ़ की हड्डी में गांठ दिखे तो इसकी सूचना आरबीएसके टीम को दें, जिससे बच्चे को समय रहते इलाज दिलाकर रोगमुक्त कराया जा सके। उन्होंने स्टाफ नर्स को ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निर्वहन करने की प्रेरणा दी। डॉ. संदीप गुप्ता ने कहा कि जन्मजात बहरापन पहचाने के लिए छह माह बाद बच्चे के सिर के पास पीछे से ताली बजाएं, यदि बच्चा पीछे नहीं मुड़ता है इसकी जानकारी टीम को दें, क्योंकि एक साल के भीतर बहरेपन की पहचान हो जाने से इलाज में आसनी रहती है, लेकिन उसके बाद दिक्कत आती है। इस दौरान सीएचसी अधीक्षक डॉ. बीके स्नेही, अमित श्रीवास्तव, अमित खरे एवं स्टाफ नर्स मौजूद रहीं।