ऐसे तो 2022 तक नसीब नहीं होगी गरीबों को छत
लखीमपुर खीरी। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गांवों में गरीबों के आवास बनाने का कार्य बहुत ही धीमी गति से हो रहा है, जिससे वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को छत मुहैया कराना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। सरकारी तंत्र इस कदर सुस्त हो चुका है कि नौ माह बीत जाने के बाद भी लक्ष्य 11936 के सापेक्ष 10 प्रतिशत भी आवास नहीं बन सके हैं। यह हाल तब है कि 3658 लाभार्थियों को तीनों किस्त यानी 1.20 लाख रुपये दिए जा चुके हैं, जबकि सात हजार से अधिक लाभार्थियों को प्रथम और द्वितीय किस्त के तौर पर एक लाख रुपये दिए जा चुके हैं।
वर्ष 2018-19 में 11936 प्रधानमंत्री आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया है, जिसके सापेक्ष 14480 लाभार्थियों का पंजीकरण कराया गया है। लक्ष्य के मुताबिक 7949 लाभार्थियों को प्रथम किस्त और इनमें से 7464 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त मिल चुकी है। जबकि 3658 लाभार्थियों को पूर्ण भुगतान यानि तीनों किस्त के रूप में 1.20 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक 808 लाभार्थियों के आवास पूर्ण रूप से बन सके हैं, जो कुल लक्ष्य का 10 प्रतिशत भी नहीं है। ऐसे हालात में शेष बचे ढाई माह के समय में 11936 आवास बनाने का लक्ष्य पूर्ण करना संभव नहीं है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वादे को झटका लग सकता है, जिसमें उन्होंने 2022 तक सभी गरीबों को छत उपलब्ध कराने का दावा किया है।
तो प्रधान और सचिव अटका रहे रोड़ा
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाती है, लेकिन लाभार्थियों के खाते से प्रधान और सचिव मिलकर पैसा निकलवाकर खुद ले रहे हैं। लाभार्थियों से कहा जा रहा है कि प्रधान और सचिव आवास बनवाएंगे। बस यहीं से कमीशनखोरी शुरू हो जाती है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है और काम भी मनमाने तरीके से कराया जा रहा है।
तो सफेदपोश के इशारे पर हो रहा काम
आवास बनाने के लिए निर्माण सामग्री जैसे ईंट, सीमेंट, सरिया, मोरंग की जरूरत होती है, जिसमें अच्छा खासा कमीशन हासिल करने की होड़ मची है। सफेदपोश नेताओं के ईंट भट्ठे संचालित हैं, जो प्रधान और सचिव पर दबाव बनाकर अपने यहां से निर्माण सामग्री की आपूर्ति कराते हैं। सूत्र बताते हैं कि असल में इन्हीं सफेदपोश के इशारे पर प्रधान और सचिव मिलकर लाभार्थियों से पैसा हड़प ले रहे हैं, जिसके बाद घटिया निर्माण सामग्री सप्लाई करके मोटा कमीशन बना रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास बनाने का काम जारी है, लेकिन शौचालय निर्माण पर सरकार का ज्यादा जोर होने से राजगीर मिस्त्रियों के न मिलने की वजह से देरी हुई है। पहले 7949 आवास बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसके बाद एक माह पहले ही करीब 3987 आवास और मिलेे हैं। प्रधान और सचिव द्वारा पैसा निकलवाए जाने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
- रामकृपाल चौधरी, परियोजना निदेशक, डीआरडीए